कोटा। बारां रेलवे अस्पताल में पिछले दस दिनों से डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण बारां-रूठियाई रेलखंड के सैकड़ों रेलवे कर्मचारियों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टर के न होने से बीमार कर्मचारियों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक बोझ भी झेलना पड़ रहा है। इसके साथ ही, कर्मचारियों के सिक-फीट (बीमारी अवकाश प्रमाण पत्र) भी नहीं बन पा रहे हैं, जिससे उनकी छुट्टियों और वेतन पर भी असर पड़ रहा है।
कर्मचारियों ने बताया कि पिछले ग्यारह दिनों में सिर्फ एक बार, शुक्रवार को कोटा से एक डॉक्टर यहां आए थे। उसके बाद से कई बार शिकायत करने के बावजूद अस्पताल में कोई भी डॉक्टर उपलब्ध नहीं हुआ है।
अस्पताल में अव्यवस्था का आलम यह है कि यहां सफाई कर्मचारी बाबू का काम कर रहे हैं। सोमवार को एक महिला सफाई कर्मचारी को बाबू का काम करते हुए देखा गया। इस पर भी कई कर्मचारियों ने आपत्ति जताई है। कर्मचारियों का कहना है कि बाबू के न होने से उनका काम समय पर नहीं हो पा रहा है, जिससे उन्हें और भी दिक्कतें हो रही हैं।
रेलवे कर्मचारियों ने संबंधित अधिकारियों से जल्द से जल्द डॉक्टर की नियुक्ति करने और अस्पताल में अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की मांग की है ताकि उन्हें और उनके परिवारों को उचित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
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