कोटा: रनिंग स्टाफ के भारी विरोध और मीडिया में प्रमुखता से मुद्दा उठाए जाने के बाद, कोटा मंडल रेल प्रशासन ने थ्रू ट्रेन संचालन से संबंधित अपने विवादास्पद आदेशों को शुक्रवार को वापस ले लिया है। इस निर्णय से लोको पायलट अब पहले की तरह ट्रेनों का संचालन कर सकेंगे, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है।
वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक (विनोद मीणा) ने मंगलवार को दो मुख्य आदेश जारी किए थे, जिनका रनिंग स्टाफ द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा था:
थ्रू ट्रेन संचालन: 6 घंटे से कम ड्यूटी वाले गार्ड और लोको पायलटों को दाढ़देवी, मोड़क और भौंरा के रास्ते थ्रू (Through) भेजने का आदेश दिया गया था।
गुना वापसी: रुठियाई से मोतीपुरा और सालपुरा आने वाले गार्ड और लोको पायलटों को वापस गुना भेजने का आदेश दिया गया था, न कि कोटा लाने का।
रनिंग स्टाफ ने इन आदेशों को 'तुगलकी फरमान' बताते हुए उन पर तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया था।
इन आदेशों को लेकर रेलवे कर्मचारी संगठनों ने भी जोरदार विरोध किया। रेलवे एम्पलाई यूनियन ने प्रशासन को पत्र लिखकर आदेश वापस लेने की मांग की, जबकि मजदूर संघ ने विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी थी।
मामले को शांत करने के लिए एडीआरएम (ADRM) ललित कुमार धुरंधर की मध्यस्थता में संघ प्रतिनिधियों और विनोद मीणा के बीच बैठक हुई। इसी बैठक में थ्रू ट्रेन संचालन के आदेशों को तत्काल वापस लेने पर सहमति बनी।
हालांकि, रेलवे प्रशासन ने लोको पायलटों को थ्रू भेजने के आदेश तो वापस ले लिए, लेकिन गुना वापस भेजने के दूसरे आदेश को फिलहाल वापस लेने के लिए तैयार नहीं हुआ है। रनिंग स्टाफ अभी भी इस आदेश को लेकर रोष में हैं और इसे भी वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
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