करौली, 30 दिसंबर: जिला कलेक्टर नीलाभ सक्सेना ने बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को सक्रिय होने और समन्वय से काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक बैठक में यह बात कही।
बाल संरक्षण योजना पर चर्चा:
बैठक में समेकित बाल संरक्षण योजना, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2000 और इसके संशोधित अधिनियम 2015 के तहत जिला स्तर पर बाल संरक्षण के लिए गठित जिला बाल संरक्षण इकाई की कार्य योजना पर चर्चा की गई। साथ ही, एक युद्ध नशे के विरुद्ध की संयुक्त कार्य योजना और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरणों की समीक्षा भी की गई।
बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण निर्देश:
जिला कलेक्टर ने बाल अधिकारिता विभाग, राजकीय और गैर-राजकीय बाल देखरेख संस्थाओं में आवासित बच्चों, और विभाग की योजनाओं के बारे में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बाल श्रम के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने, कक्षा 9 से 12 तक के बच्चों को हर सप्ताह नशा मुक्ति के खिलाफ जागरूक करने, राजकीय और गैर-राजकीय विद्यालयों में छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य जांच करने, बच्चों को खेलकूद और मनोरंजन सहित अन्य गतिविधियां करवाने के भी निर्देश दिए।
बाल श्रम और भिक्षावृत्ति पर रोक:
बैठक में बाल श्रम और भिक्षावृत्ति की रोकथाम के लिए गठित समिति के कार्यों की समीक्षा के दौरान, जिला कलेक्टर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को बाल श्रम और भिक्षावृत्ति की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विद्यालयों में प्रहरी क्लब के शत-प्रतिशत गठन करने और जहां एच और एक्स प्रकार की दवाएं बेची जाती हैं, उन सभी मेडिकल स्टोर पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए।
बाल नशा मुक्ति और प्रहरी क्लब:
बैठक में सदस्य सचिव, सहायक निदेशक, बाल अधिकारिता विभाग को आदेशित किया गया कि बाल नशा मुक्ति और प्रहरी क्लब के बारे में जानकारी देने के लिए बाल कल्याण समिति और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यालयों में विजिट की जाए।
बैठक में उपस्थित अधिकारी:
बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिवचरण मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गुमनाराम, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।
यह खबर क्यों है महत्वपूर्ण?
यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि जिला प्रशासन बच्चों के अधिकारों के संरक्षण को गंभीरता से ले रहा है। जिला कलेक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों से बच्चों के जीवन में सुधार आएगा और उन्हें एक सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिलेगा।
आप क्या कर सकते हैं?
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