कोटा। कोटा रेलवे स्टेशन के यार्ड में शुक्रवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। शंटिंग के दौरान एक रेल इंजन पटरी से नीचे उतर गया। हालांकि, घटना यार्ड के भीतर होने के कारण मुख्य रेल मार्ग (Main Line) पर ट्रेनों का आवागमन प्रभावित नहीं हुआ, लेकिन इस पूरी घटना को गोपनीय रखने की कोशिशों ने चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, यह घटना शुक्रवार सुबह करीब 7:40 बजे की है।
स्थान: आरओएच (ROH) डिपो के पास पॉइंट पर शंटिंग के दौरान इंजन के दो पहिए अचानक पटरी से नीचे उतर गए।
गोपनीयता: नियमानुसार ऐसी घटनाओं पर हूटर बजाकर 'दुर्घटना राहत ट्रेन' (ART) को रवाना किया जाता है, लेकिन इस मामले में न तो हूटर बजाया गया और न ही एआरटी भेजी गई।
जुगाड़ से मरम्मत: फोन पर मिली गोपनीय सूचना के बाद कर्मचारी एक पुश ट्रॉली में जैक और अन्य उपकरण लेकर मौके पर पहुंचे। करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद जैकों की मदद से इंजन को वापस पटरी पर चढ़ाया जा सका।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस दुर्घटना के पीछे ट्रैक के रखरखाव में हुई लापरवाही सामने आ रही है:
ट्रैक की स्थिति: बताया जा रहा है कि हाल ही में इस ट्रैक से पुरानी गिट्टी हटाकर नई गिट्टी डाली गई थी।
अनदेखी: नई गिट्टी डालने के बाद उसकी आवश्यक 'पैकिंग' (मजबूती) नहीं की गई थी, जिससे रेल पटरियां ढीली रह गईं।
परिणाम: ढीली पटरियों पर इंजन का भार पड़ते ही संतुलन बिगड़ गया और पहिए नीचे उतर गए। इस घटना में रेलवे ट्रैक को भी नुकसान पहुंचने की खबर है।
इस संवेदनशील मामले में जब मंडल रेल प्रबंधक (DRM) अनिल कालरा से व्हाट्सएप मैसेज के जरिए जानकारी मांगी गई, तो उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। अधिकारियों की इस चुप्पी को कर्मचारी और जानकार 'मामले को दबाने की कोशिश' के रूप में देख रहे हैं।
यार्ड की छोटी-छोटी घटनाओं की अनदेखी भविष्य में किसी बड़े हादसे का सबब बन सकती है, ऐसे में रेल सुरक्षा से जुड़े इन पहलुओं पर जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
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