करोड़ों खर्च के बाद भी 'पानी-पानी' हुए स्टेशन: पहली मावठ ने खोली रेलवे के दावों की पोल

करोड़ों खर्च के बाद भी 'पानी-पानी' हुए स्टेशन: पहली मावठ ने खोली रेलवे के दावों की पोल

कोटा | रेलवे प्रशासन द्वारा यात्री सुविधाओं और स्टेशनों के आधुनिकीकरण के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन पहली मावठ (बेमौसम बारिश) ने ही इन दावों की हकीकत बयां कर दी है। कोटा मंडल के गंगापुर सिटी और बयाना रेलवे स्टेशनों पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

गंगापुर सिटी स्टेशन: नए काम की उखड़ती साख

हाल ही में गंगापुर सिटी रेलवे स्टेशन का नवीनीकरण किया गया है, लेकिन पहली बारिश में ही स्टेशन का भवन और टीन शेड टपकने लगे। आलम यह था कि दीवारों के सहारे छत का पानी झरने की तरह प्लेटफॉर्म पर गिर रहा था।

  • नुकसान की आशंका: दीवारों पर लगे महंगे लाल पत्थर लगातार नमी के कारण खराब हो सकते हैं।

  • यात्रियों की चिंता: यात्रियों का कहना है कि जब मामूली मावठ में यह हाल है, तो मानसून की भारी बारिश में स्टेशन की क्या दशा होगी?

बयाना स्टेशन: शिकायतों के बाद भी सुधार नहीं

बयाना स्टेशन पर स्थिति और भी बदतर नजर आई। मंगलवार को हुई दूसरी मावठ के दौरान भी टीन शेड से पानी का टपकना जारी रहा।

  • पानी सीधे प्लेटफॉर्म पर रखी बैंचों पर गिर रहा था, जिससे यात्रियों के पास बैठने तक की जगह नहीं बची।

  • प्रशासन को अवगत कराए जाने के बावजूद अब तक सुधार की कोई ठोस कार्रवाई धरातल पर नहीं दिखी है।

भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के आरोप

स्टेशनों पर हुए इस काम को लेकर यात्रियों और स्थानीय लोगों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि रेलवे ने नवीनीकरण के नाम पर करोड़ों रुपए फूंक दिए, लेकिन काम की गुणवत्ता 'जीरो' है।

"यह काम चंद साल भी टिक जाए तो बड़ी बात होगी। सरकारी पैसे की इस कदर बर्बादी देखना दुखद है।" — एक परेशान यात्री

पुराना है 'घटिया काम' का इतिहास

गंगापुर स्टेशन पर निर्माण की गुणवत्ता को लेकर विवाद नया नहीं है।

  • पूर्व में तत्कालीन DRM मनीष तिवारी के कार्यकाल के दौरान भी घटिया काम पकड़ा गया था।

  • उस समय प्लेटफॉर्म की टाइलों को उखाड़ने के आदेश दिए गए थे और ठेकेदार का भुगतान रोकने की बात कही गई थी।

  • बावजूद इसके, वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि पुरानी गलतियों से कोई सबक नहीं लिया गया।


निष्कर्ष: रेलवे प्रशासन एक ओर 'विश्वस्तरीय स्टेशन' बनाने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी ड्रेनेज और शेड की फिटिंग में विफलता उनके दावों की पोल खोल रही है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कोई सख्त कार्रवाई होगी या यात्री यूं ही भीगने को मजबूर रहेंगे?

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