सादगी की मिसाल: विदाई पर न बैंड-बाजा, न लग्जरी गाड़ी; साइकिल से घर लौटे लॉबी पर्यवेक्षक

कोटा। जहाँ आज के दौर में रिटायरमेंट कार्यक्रमों में भारी ताम-झाम, महंगी गाड़ियों और बैंड-बाजों का चलन बढ़ गया है, वहीं कोटा के एक रेल कर्मचारी ने अपनी विदाई को यादगार बनाने के लिए सादगी का अनूठा रास्ता चुना। 31 दिसंबर को अपनी सेवानिवृत्ति के अवसर पर पूर्व ड्राइवर एवं लॉबी पर्यवेक्षक (सीटीसीसी) संतोष कुमार शर्मा अपनी सजी हुई साइकिल पर सवार होकर घर पहुंचे।

फूलों से सजाई गई 'साइकिल'

संतोष कुमार शर्मा के रिटायरमेंट के दिन उनके साथी कर्मचारियों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी। विशेष बात यह रही कि किसी लग्जरी वाहन के बजाय शर्मा की साइकिल को ही फूलों और मालाओं से भव्य तरीके से सजाया गया था। बड़ी संख्या में मौजूद सहकर्मियों ने उन्हें फूलमालाएं पहनाकर और शुभकामनाएं देकर विदा किया।

फिजूलखर्ची के खिलाफ संदेश

बिना किसी दिखावे, घोड़ी या महंगे खर्च के सादे तरीके से हुए इस विदाई समारोह की पूरे विभाग और शहर में चर्चा हो रही है। शर्मा का यह कदम समाज को फिजूलखर्ची से बचने और सादगीपूर्ण जीवन जीने का संदेश देता है।

एक शानदार करियर का सफर

उल्लेखनीय है कि संतोष कुमार शर्मा ने रेलवे में एक लंबा और सराहनीय सफर तय किया है। उन्होंने:

  • लोको पायलट के रूप में ट्रेनें दौड़ाईं।

  • लोको निरीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं।

  • अक्टूबर तक और अंततः रिटायरमेंट तक लॉबी पर्यवेक्षक के रूप में कार्यभार संभाला।

उनके साथियों का कहना है कि संतोष कुमार शर्मा अपने पूरे कार्यकाल के दौरान अनुशासन और सादगी के लिए जाने जाते रहे हैं, और उनका प्रस्थान भी उनकी इसी छवि के अनुरूप रहा।


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