रेलवे अस्पताल में जरूरत से ज्यादा दवाइयों का स्टॉक, लाखों का चूना लगने की आशंका

रेलवे अस्पताल में जरूरत से ज्यादा दवाइयों का स्टॉक, लाखों का चूना लगने की आशंका

 

कोटा। कोटा रेलवे अस्पताल में निर्धारित मात्रा से अधिक दवाइयां मंगाने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि जरूरत से ज्यादा दवाइयां आ जाने के कारण प्रशासन अब उन्हें खपाने में लगा हुआ है, जिससे रेलवे को लाखों रुपये का वित्तीय नुकसान होने की आशंका है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन इस मामले में अनभिज्ञता जता रहा है।

सूत्रों के अनुसार, रेलवे अस्पताल की मांग पर जबलपुर मुख्यालय से दवाइयों की आपूर्ति की जाती है। पहले यह मांग मैनुअल तरीके से भेजी जाती थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) के माध्यम से ऑनलाइन होती है।


एक करोड़ से ज्यादा की सप्लाई, डेढ़ गुनी अधिक पहुंचने का अनुमान

लोकल खरीद के अलावा, रेलवे अस्पताल में हर साल एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की दवाइयां मंगाई जाती हैं। लेकिन इस बार, अनुमान है कि अस्पताल में डेढ़ से दोगुनी कीमत की दवाइयां पहुंच गई हैं। ज्यादा स्टॉक होने के कारण मरीजों को भी "खुलकर" दवाइयां बांटी जा रही हैं। जिन मरीजों को कम मात्रा में दवाई की आवश्यकता होती है, उन्हें भी पूरा पत्ता थमाया जा रहा है। उदाहरण के लिए, आई ड्रॉप, जो पहले मरीजों को दो-चार से ज्यादा नहीं दिए जाते थे, अब 10 से 12 तक दिए जा रहे हैं।


HMIS की गड़बड़ी और मुख्यालय की लापरवाही जिम्मेदार?

सूत्रों का मानना है कि दवाइयों के अधिक स्टॉक आने के पीछे HMIS सिस्टम में हुई गड़बड़ी एक संभावित कारण हो सकती है। चूंकि यह एक नया सिस्टम है, इसकी पूरी समझ न होने के कारण कई बार मांग डबल फीड हो जाती है, जिस पर अधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं दिया जाता। इसके चलते एक ही मांग दो बार मुख्यालय तक पहुंच जाती है।

मुख्यालय ने भी इस गड़बड़ी पर ध्यान देना उचित नहीं समझा। कोटा द्वारा जितनी दवाइयां मांगी गईं, उन्हें बिना जांच के ही भेज दिया गया। मुख्यालय ने दवाइयां भेजते समय पिछली मांगों का भी ध्यान नहीं रखा।


गड़बड़ी करने वाले को मिला इनाम!

इस पूरे मामले की सबसे खास बात यह है कि इस गड़बड़ी के कथित जिम्मेदार स्टोर इंचार्ज डॉ. धीरज गोयल को हाल ही में पश्चिम-मध्य रेलवे की महाप्रबंधक शोभना उपाध्याय ने जीएम अवार्ड से सम्मानित किया है। डॉ. गोयल को यह अवार्ड रेलवे अस्पताल प्रशासन की सिफारिश पर मिला है।


अधिकारियों के विरोधाभासी बयान

जब इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुपर्णा सेन रॉय से बात की गई, तो उन्होंने अस्पताल में निर्धारित से अधिक मात्रा में दवाइयां आने की जानकारी होने से इनकार किया और कहा कि मामले को दिखवाया जाएगा। वहीं, अस्पताल स्टोर इंचार्ज डॉ. धीरज गोयल का बयान विरोधाभासी था। उन्होंने कहा कि अस्पताल में इस बार दवाइयां कम आई हैं और उन्हें अन्य मंडलों से मंगाकर पूर्ति करनी पड़ रही है। उन्होंने HMIS में ऑटो फीड की समस्या की बात भी स्वीकार की।

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