जयपुर। राजस्थान में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत कई जगह पर लाभार्थी परिवार के सदस्यों के साथ जानवरों के नाम लिखवा कर उनके नाम से राशन ले रहे हैं. यह बात खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने भी मानी है. बुधवार को खाद्य सुरक्षा पोर्टल को फिर से प्रारंभ करने की जानकारी देते हुए मंत्री सुमित गोदारा ने मीडिया को बताया कि पोर्टल के प्रारंभ होने से खाद्य सुरक्षा से जुड़ने की प्रक्रिया आसान एवं पारदर्शी होगी. इसके साथ गोदारा ने आर्थिक रूप से सक्षम लाभार्थियों से 'गिव अप' अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा छोड़ने की अपील भी की.
शोषित एवं वंचित तबकों को लाभ मिले: खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि समाज के शोषित एवं वंचित तबकों को खाद्य सुरक्षा योजना से जोड़ना, प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सर्वोच्च प्राथमिकता है. राज्य सरकार की ओर से गत एक वर्ष में 13 लाख लोगों को खाद्य सुरक्षा से जोड़ा गया है. इनमें 1.60 लाख से अधिक विशेष योग्यजन भी सम्मिलित हैं. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार विभाग लगातार खाद्य सुरक्षा से वंचित लोगों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रहा है. इसी क्रम में 26 जनवरी को मुख्यमंत्री की ओर से खाद्य सुरक्षा पोर्टल को पुनः प्रारंभ किया गया. गोदारा ने कहा कि गत वर्षों से खाद्य सुरक्षा से जुड़ने के लिए लंबित 9 लाख आवेदनों का त्वरित निस्तारण किया जा रहा है ताकि पात्र लोग खाद्य सुरक्षा से जुड़ सकें. प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए स्वीकृत किए गए आवेदनों की रैंडम चेकिंग का भी प्रावधान किया गया है. खाद्य सुरक्षा से वंचित परिवारों को एनएफएसए से जोड़ने के लिए अधिकृत करना प्रस्तावित है.
पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना हुआ आसान: उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से प्रारंभ किए गए पोर्टल से खाद्य सुरक्षा अधिनियम से जुड़ने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाया गया है. पोर्टल पर आवेदन स्वयं या ई मित्र के माध्यम से किया जा सकता है. आवेदन स्वीकृत करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवेदन की त्रिस्तरीय जांच की जाएगी. प्राप्त आवेदन निस्तारण के लिए संबंधित अपीलीय अधिकारी के समक्ष ऑनलाइन जाएगा. अपीलीय अधिकारी की ओर से प्राप्त आवेदन को शहरी क्षेत्र में नगरीय निकायों के अधिशाषी अधिकारी/आयुक्त एवं ग्रामीण क्षेत्र में ब्लॉक विकास अधिकारी को जांच के लिए प्रेषित किया जाएगा.
इस नंबर पर करें शिकायत: अधिकारियों की ओर से आवेदन की जांच के लिए गठित कमेटी से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर नाम जोड़ने के संबंध में स्पष्ट अभिमत के साथ प्रकरण अपीलीय अधिकारी को पुनः प्रेषित किया जाएगा. इसके बाद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में नाम जोड़ने या नहीं जोड़ने का निर्णय लेकर आवेदन निस्तारित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि विभाग को पोर्टल के माध्यम से निरंतर आवेदन प्राप्त हो रहे हैं और उनके एक माह के अंदर निस्तारण की कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि ई मित्र पर आवेदन के लिए 50 रुपए का शुल्क रखा गया है. इससे अधिक राशि मांगने या विभाग से जुड़े किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार की शिकायत आमजन हेल्पलाइन नंबर 1800-180-6030 पर कर सकते हैं.
88 प्रतिशत से अधिक लोगों की ई-KYC सम्पन्न: गोदारा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दिशा निर्देशों की पालना में अधिकतम लोगों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ई-केवाईसी की प्रक्रिया को प्रभावी रूप से संपन्न करवाया जा रहा है. 28 जनवरी 2025 तक खाद्य सुरक्षा के अंतर्गत आने वाले 88 प्रतिशत से अधिक लोगों की ई केवाईसी सम्पन्न हो चुकी है. राज्य सरकार की ओर से संवेदनशीलता के आधार पर 70 साल से ऊपर के लोगों को ई केवाईसी से छूट दी गई है. साथ ही 10 साल की आयु से कम के बच्चों को भी ई केवाईसी की बाध्यता से बाहर रखा गया है.
गिव अप' अभियान से स्वत: छोड़ी खाद्य सुरक्षा: उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से संचालित 'गिव अप' अभियान के अंतर्गत राज्य में अब तक 8.38 लाख से अधिक व्यक्तियों ने खाद्य सुरक्षा सूची से स्वत: अपना नाम हटवाया है. अभियान 28 फरवरी 2025 तक अनवरत जारी रहेगा. गरीबी रेखा से ऊपर उठ चुके लोगों के स्वत: अपना नाम हटवाने से राज्य सरकार और अधिक पात्र लोगों को खाद्य सुरक्षा दे पाएगी. उन्होंने खाद्य सुरक्षा सूची में शामिल सक्षम लोगों से स्वत: गिव अप अभियान से जुड़कर अपना नाम हटवाने की अपील की. उन्होंने कहा कि स्वत: नाम नहीं हटवाने की स्थिति में खाद्य सुरक्षा से जुड़े अपात्र परिवारों को चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. वसूली या अन्य दंडात्मक कार्रवाई से बचने के लिए अपात्र व्यक्ति अपना नाम खाद्य सुरक्षा सूची से हटवाएं.
ये परिवार खाद्य सुरक्षा के लिए अपात्र: खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से जारी दिशा निर्देशों के अनुसार ऐसे परिवार, जिनके कोई भी एक सदस्य आयकर दाता हों, जिनका कोई भी एक सदस्य सरकारी/अर्द्धसरकारी/स्वायत्तशासी संस्थाओं में नियमित कर्मचारी/अधिकारी हो या एक लाख रुपये वार्षिक से अधिक पेंशन प्राप्त करता है, जिनके किसी भी एक सदस्य के पास चारपहिया वाहन हो (ट्रेक्टर एवं एक वाणिज्यिक वाहन को छोड़कर), जिनके सभी सदस्यों के स्वामित्व में कुल कृषि भूमि लघुकृषक के लिए निर्धारित सीमा से अधिक हो, खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत अपात्र होंगे.
साथ ही ऐसे परिवार, जिनके सभी सदस्यों की कुल आय एक लाख रुपए वार्षिक से अधिक हो, जिनके पास ग्रामीण क्षेत्र में 2000 वर्गफीट से अधिक स्वयं के रिहायश के लिए निर्मित पक्का मकान हो, नगर निगम/नगर परिषद क्षेत्र में 1000 वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल में निर्मित पक्का आवासीय/व्यवसायिक परिसरधारी परिवार (कच्ची बस्ती को छोड़कर), नगर पालिका क्षेत्र में 1500 वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल में निर्मित पक्का आवासीय/व्यवसायिक परिसरधारी परिवार (कच्ची बस्ती को छोड़कर), खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत अपात्र होंगे. गोदारा ने कहा कि कई जगह पर यह शिकायतें भी सामने आएगी लाभार्थियों ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ जानवरों के नाम भी खाद्य सुरक्षा में जुड़वा रखे हैं. इन सब की बारीकी से जांच हो रही है जो दोषी होगा उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.
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