राजस्थान - भरतपुर जिले की सड़कों पर फर्जी रोडवेज बसों का धड़ल्ले से संचालन हो रहा है, जिससे यात्रियों को भारी भ्रम हो रहा है और सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। निजी बस संचालकों ने राजस्थान रोडवेज जैसी दिखने वाली बसों को सड़कों पर उतार दिया है, जिससे असली और नकली बसों में फर्क करना मुश्किल हो गया है।
परिवहन विभाग की निष्क्रियता
हैरानी की बात है कि लगातार शिकायतों के बावजूद, परिवहन विभाग इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। इससे निजी बस माफिया बेखौफ होकर नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
रोडवेज को लाखों का नुकसान
केंद्रीय बस स्टैंड, भरतपुर के मुख्य प्रबंधक शक्ति सिंह ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रादेशिक परिवहन अधिकारी (आरटीओ) को लिखित शिकायत दी है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि इन फर्जी बसों के कारण रोडवेज को हर महीने लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
निजी बस संचालकों की साजिश
मुख्य प्रबंधक के अनुसार, निजी बस संचालक जानबूझकर रोडवेज जैसी पेंट करा रहे हैं ताकि यात्रियों को गुमराह किया जा सके। रोडवेज विभाग की अधिकृत बसें नियमों के अनुसार चलती हैं, जबकि ये निजी बसें मनमाना किराया वसूल रही हैं।
यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में
मुख्य प्रबंधक शक्ति सिंह ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ये फर्जी बसें तकनीकी और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रही हैं और ओवरलोडिंग और ओवरस्पीड जैसी समस्याओं को जन्म दे रही हैं।
परिवहन विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में
परिवहन विभाग की चुप्पी इस मामले में कई सवाल खड़े कर रही है। बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में है।
अधिकारियों के जवाब
प्रादेशिक परिवहन अधिकारी पीएल बमनिया ने इस मामले पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया, जबकि डीटीओ अभय मुदगल ने कहा कि शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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