कोटा/बूंदी। कोटा रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले कोटा-चित्तौड़गढ़ रेलखंड में चलती ट्रेनों में चोरी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार रात दो अलग-अलग ट्रेनों में हुई चोरी की वारदातों ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी (GRP) के सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है। यात्रियों का आरोप है कि वारदातों के समय न तो कोच में टीटीई नजर आए और न ही सुरक्षाकर्मी।
बूंदी निवासी लेखाधिकारी गजेंद्र कुमार अपनी पत्नी और सहायक लेखाधिकारी लाड बाई के साथ उदयपुर से लौट रहे थे। नीम का खेड़ा स्टेशन के पास सोते समय लाड बाई का पर्स चोरी हो गया।
नुकसान: 80 हजार रुपये के सोने के टॉप्स, मोबाइल और नकदी।
बड़ी लापरवाही: पीड़ित ने बताया कि कोच में कोई गश्त नहीं थी। ताज्जुब की बात यह है कि चोरी गया मोबाइल रविवार रात तक बज रहा था और लोकेशन नीम का खेड़ा के पास मिली, लेकिन पुलिस की निष्क्रियता के कारण चोर पकड़ से बाहर है।
आगरा-असारवा होली स्पेशल (01919) में यात्रा कर रहे मनीष कुमार की पत्नी आरती का पर्स मांडलगढ़ और बस्सी बेरीसाल के बीच चोरी हो गया।
नुकसान: पर्स में 2 हजार रुपये नकदी और जरूरी दस्तावेज थे। इसकी रिपोर्ट अहमदाबाद जीआरपी में दर्ज कराई गई है।
रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि बस्सी बेरीसाल स्टेशन के पास पिछले 12 दिनों में यह दूसरी बड़ी चोरी है।
9 फरवरी: मेवाड़ एक्सप्रेस के सेकंड एसी कोच से महिला का पर्स चोरी हुआ था, जिसमें 5 लाख रुपये के सोने के कड़े और मोबाइल थे।
14 फरवरी: जयपुर-नागपुर ट्रेन में भवानीमंडी के पास करीब एक दर्जन चोरी और लूट के मामले चर्चा में आए थे, हालांकि जीआरपी केवल एक मामला दर्ज होने की बात कह रही है।
यात्रियों का कहना है कि रेल प्रशासन त्योहारों पर स्पेशल ट्रेनें तो चला देता है, लेकिन उनमें सुरक्षा के इंतजाम करना भूल जाता है। पिछले साल भी दिवाली स्पेशल ट्रेनों में इसी रेलखंड पर कई चोरियां हुई थीं। आरपीएफ और जीआरपी लगातार गश्त बढ़ाने के दावे तो करते हैं, लेकिन हकीकत में यात्री भगवान भरोसे सफर करने को मजबूर हैं।
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