कोटा। रामगंजमंडी में वरिष्ठ खंड अभियंता (रेल पथ) संजय झा की मनमानी और तानाशाही के विरोध में ट्रैकमैनों का धरना प्रदर्शन मंगलवार को दूसरे दिन और अधिक उग्र हो गया। रामगंजमंडी की विभिन्न यूनिटों के कर्मचारियों ने सहायक मंडल अभियंता के कार्यालय के समक्ष भारी संख्या में एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया और संजय झा को हटाने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की।
ट्रैकमैनों ने संजय झा पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें नियम विरुद्ध काम कराना, खराब व्यवहार, शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना, अभद्रता, निर्धारित से अधिक घंटे तक काम कराना और गलत तरीके से चार्ज शीट थमाना शामिल है। इस विरोध प्रदर्शन को एससी-एसटी एसोसिएशन का भी समर्थन प्राप्त हुआ।
ट्रैकमैनों द्वारा सोमवार को शुरू किया गया यह धरना प्रदर्शन मंगलवार को 'कोटा रेल न्यूज़' में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ। कर्मचारियों ने इस खबर को ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से कोटा मंडल डीआरएम, जबलपुर मुख्यालय महाप्रबंधक और रेल मंत्री तक पहुंचा दिया। मामला उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद रेल अधिकारियों में हड़कंप मच गया और वे तुरंत मामले को शांत कराने में जुट गए।
लगातार बढ़ते दबाव के बाद देर शाम ट्रैकमैनों और अधिकारियों के बीच समझौता हुआ, जिसके बाद आंदोलन को स्थगित कर दिया गया। रामगंजमंडी शाखा सचिव महेंद्र मीणा ने बताया कि संजय झा के ट्रांसफर को छोड़कर अन्य सभी मांगों पर सहमति बन गई है।
समझौते की प्रमुख बातें:
अभी तक दी गई सभी चार्जशीटों को निरस्त किया जाएगा।
किसी भी ट्रैकमैन को टारगेट नहीं बनाया जाएगा।
मनमर्जी और तानाशाही पूर्ण रवैया नहीं अपनाया जाएगा।
आपसी मतभेद वाली समस्याओं को कार्य स्थल पर ही बातचीत के माध्यम से सुलझाया जाएगा।
अधिकारियों ने संजय झा का भी जल्द ट्रांसफर करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, ट्रैकमैनों ने चेतावनी दी है कि यदि यह ट्रांसफर जल्द नहीं हुआ तो आंदोलन को फिर से शुरू किया जा सकता है।
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