कृष्ण की धरती से कम हो रहा वन क्षेत्र: 5 वर्षों में 16 वर्ग किमी की गिरावट, पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा

कृष्ण की धरती से कम हो रहा वन क्षेत्र: 5 वर्षों में 16 वर्ग किमी की गिरावट, पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा

भरतपुर: बृज क्षेत्र के भरतपुर जिले का वन क्षेत्र लगातार घट रहा है, जिससे पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार, जिले में पिछले 5 वर्षों में वन क्षेत्र में 16 वर्ग किमी की गिरावट दर्ज की गई है।

चौंकाने वाले आंकड़े

रिपोर्ट के मुताबिक, भरतपुर का कुल वन क्षेत्र केवल 4.23% है, जो राष्ट्रीय औसत और राष्ट्रीय वन नीति 1988 द्वारा निर्धारित 33% लक्ष्य से बहुत कम है। 2019 में भरतपुर का वन क्षेत्र 230.27 वर्ग किमी था, जो 2023 में घटकर 214.28 वर्ग किमी रह गया।

खुले वनक्षेत्र में भारी गिरावट

विशेष रूप से, खुले वनक्षेत्र में सबसे अधिक गिरावट देखी गई है। 2019 में 208.27 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाले खुले वनक्षेत्र का आकार 2023 में घटकर मात्र 167.17 वर्ग किमी रह गया। यह 41.10 वर्ग किमी की कमी दर्शाता है, जो चिंता का गंभीर विषय है।

जंगल में आग की घटनाएं

भरतपुर जिले में जंगल में आग की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। 2022-23 में 11 और 2023-24 में 13 घटनाएं दर्ज की गईं, जो वनक्षेत्र की सुरक्षा और जैव विविधता के लिए एक बड़ी चुनौती है।

स्थानीय प्रशासन और सरकार की निष्क्रियता

वनक्षेत्र में गिरावट को रोकने के लिए न तो स्थानीय प्रशासन ने ठोस कदम उठाए हैं और न ही राज्य सरकार ने प्रभावी योजनाओं को लागू किया है। वन विभाग के डीएफओ मानस सिंह ने कहा कि विभाग जिले में बड़े पैमाने पर पौधारोपण कार्यक्रम चला रहा है, लेकिन खुले वन क्षेत्र में गिरावट को रोकने में सफलता नहीं मिल रही है।

पर्यावरणविदों की चिंता

पर्यावरणविद डॉ. केपी सिंह ने रिपोर्ट को चिंताजनक बताते हुए कहा कि अत्यंत घने वन का अभाव और खुले वनक्षेत्र की कमी जैव विविधता को गंभीर जोखिम में डाल सकती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को आग की घटनाओं को रोकने और वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

जिले में वन क्षेत्र का असमान वितरण

भरतपुर की तहसीलों में वनक्षेत्र का वितरण असमान है। वैर और बयाना तहसीलों में मध्यम घने जंगल मौजूद हैं, जबकि केवलादेव नेशनल पार्क खुला वन क्षेत्र है। डीग, कुम्हेर और कामां तहसीलों में वन क्षेत्र का हिस्सा बहुत कम है।

सरकार और प्रशासन के लिए सवाल

घटते वन क्षेत्र और पर्यावरणीय खतरों के बीच यह सवाल उठता है कि पर्यावरण संरक्षण की योजनाओं का क्रियान्वयन कौन करेगा। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को अब ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि भरतपुर के वन क्षेत्र को पुनः स्थापित किया जा सके और जैव विविधता को संरक्षित किया जा सके।

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