कोटा: कोटा रेल मंडल में रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर एक महिला से ढाई लाख रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा निवासी आरती नामक महिला की रिपोर्ट पर कोटा जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने रेलवे भर्ती प्रक्रिया की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरती ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कुछ दिनों पहले उन्हें एक कॉल लेटर मिला था। उस पर दिए गए पते पर संपर्क करने पर उन्हें रेलवे में नौकरी लगने की जानकारी दी गई और फिर कोटा बुलाया गया। यहां डीआरएम (मंडल रेल प्रबंधक) ऑफिस में उन्हें एक अलग कमरे में बैठाकर परीक्षा दिलवाई गई। इसके कुछ दिनों बाद रेलवे अस्पताल में उनका मेडिकल परीक्षण भी कराया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इसके बाद डीआरएम ऑफिस में ही उनकी सात दिन की ट्रेनिंग भी करवाई गई। इस दौरान नौकरी लगने का झांसा देकर कुछ लोगों ने उनसे ढाई लाख रुपये ऐंठ लिए और जल्द ही पोस्टिंग लेटर दिलवाने का वादा किया।
आरती ने बताया कि जब काफी दिनों तक पोस्टिंग लेटर नहीं आया और उनसे संपर्क भी नहीं हो सका, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने कोटा जीआरपी में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद जीआरपी गुरुवार को आरती को लेकर डीआरएम ऑफिस पहुंची। यहां पुलिस ने आरती से उन स्थानों की पहचान कराई जहां उनकी ट्रेनिंग और परीक्षा हुई थी। साथ ही, उन्होंने आरती से आरोपियों की पहचान कराने की भी कोशिश की। भारी पुलिस बल के साथ एक महिला को डीआरएम ऑफिस में देखकर हड़कंप मच गया और अधिकारी व कर्मचारी आपस में जानकारी जुटाते नजर आए।
इसके बाद जीआरपी आरती को लेकर रेलवे अस्पताल भी गई, जहां उन्होंने मेडिकल होने वाली जगह की पहचान करवाई और मेडिकल करने वाले कर्मचारियों को भी पहचानने के लिए कहा। हालांकि, जीआरपी फिलहाल मामले का खुलासा करने से बच रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरती को मिले कॉल लेटर में पश्चिम-मध्य रेलवे जबलपुर मुख्यालय के एक बड़े अधिकारी के हस्ताक्षर थे, हालांकि ये हस्ताक्षर नकली हो सकते हैं। उल्लेखनीय है कि इसी अधिकारी का नाम हाल ही में दो महिलाओं के डमी कैंडिडेट के जरिए नौकरी लगने के मामले में भी सामने आया था।
सूत्रों की मानें तो इस मामले में एक दर्जन से अधिक लोग ठगी का शिकार हो सकते हैं, हालांकि अभी तक केवल एक मामला ही सामने आया है। इस एक मामले के उजागर होने के बाद अन्य पीड़ितों के भी सामने आने की उम्मीद है।
सूत्रों ने यह भी आशंका जताई है कि यह पूरा मामला किसी बड़े रैकेट द्वारा संचालित किया जा रहा है, जिसमें कई बड़े रेल अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। यह संभावना इसलिए प्रबल है क्योंकि डीआरएम ऑफिस जैसे संवेदनशील क्षेत्र में फर्जी तरीके से परीक्षा और सात दिन तक ट्रेनिंग हो जाती है और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगती। जबकि डीआरएम ऑफिस के दोनों प्रवेश द्वारों पर आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) तैनात रहता है और जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए हैं।
यह भी उल्लेखनीय है कि कोटा मंडल में फर्जी भर्ती का यह एक साल में दूसरा मामला है। इससे पहले डमी कैंडिडेट के जरिए दो महिलाओं की नौकरी लगने का मामला सामने आया था, जिसमें रेलवे ने दोनों महिलाओं को बर्खास्त कर दिया था और दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था। उस मामले की जांच सीबीआई कर रही है।
इस नए मामले पर कोटा जीआरपी के पुलिस उपाधीक्षक शंकर लाल ने कहा कि रेलवे में नौकरी के नाम पर एक महिला से धोखाधड़ी का मामला सामने आया है और जीआरपी मामले की गहन जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई का पता चल सकेगा।
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