कोटा | पश्चिम-मध्य रेलवे (WCR) के जबलपुर जोन में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के भीतर 'अटैचमेंट' का एक बड़ा खेल सामने आया है। नियमों को ताक पर रखकर बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती कागजों में कहीं और, जबकि वास्तविकता में कहीं और दिखाई दे रही है। यह सिलसिला पिछले दो-तीन सालों से बिना किसी रोक-टोक के बदस्तूर जारी है।
आरपीएफ महानिदेशक ने स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं कि बिना किसी ठोस कारण के किसी भी जवान को मूल तैनाती स्थल से हटाकर दूसरी जगह अटैच नहीं किया जाएगा। यदि कहीं मैनपावर की जरूरत है, तो वहां विधिवत पोस्टिंग होनी चाहिए। लेकिन, जबलपुर जोन के कोटा, भोपाल और जबलपुर मंडलों में रसूखदार जवानों और चहेतों को उपकृत करने के लिए आदेशों के बीच से 'पतली गलियां' निकालकर उन्हें मनचाही जगहों पर टिकाया गया है।
हैरानी की बात यह है कि कई जवानों का ट्रांसफर हो जाने के बावजूद वे अपनी पुरानी जगह छोड़ने को तैयार नहीं हैं। जुगाड़ के दम पर वे कागजों में नई जगह जॉइनिंग दिखा देते हैं, लेकिन धरातल पर पुरानी जगह ही जमे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह खेल केवल प्रशासनिक सुविधा के नाम पर नहीं, बल्कि 'अपनों' को फायदा पहुंचाने के लिए खेला जा रहा है।
कोटा मंडल में यह स्थिति स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है:
वर्कशॉप आरपीएफ के कई जवान वर्तमान में कंट्रोल में ड्यूटी कर रहे हैं।
रिजर्व कंपनी और अन्य चौकियों के जवान लंबे समय से वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त (Sr. DSC) कार्यालय में डेरा डाले हुए हैं।
लंबे समय से एक ही जगह जमे इन 'विशिष्ट' जवानों के कारण फील्ड में काम करने वाले अन्य जवानों में भारी रोष है। नियमानुसार काम करने वाले जवानों का कहना है कि जहां एक ओर फील्ड में स्टाफ की कमी रहती है, वहीं दूसरी ओर रसूखदार जवान ऑफिसों और मलाईदार सीटों पर अटैच होकर आराम फरमा रहे हैं।
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