खेल के नाम पर खेल! कोटा रेलवे के क्रिकेट खिलाड़ियों का कारनामा: छुट्टी ली छबड़ा के लिए, खेलने पहुँचे कहीं और

खेल के नाम पर खेल! कोटा रेलवे के क्रिकेट खिलाड़ियों का कारनामा: छुट्टी ली छबड़ा के लिए, खेलने पहुँचे कहीं और

कोटा | कोटा रेल मंडल में इन दिनों क्रिकेट खिलाड़ियों की एक बड़ी 'फील्डिंग' चर्चा का विषय बनी हुई है। आरोप है कि रेलवे की क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों ने सरकारी ड्यूटी से स्पेशल छुट्टी (SCL) तो छबड़ा में आयोजित टूर्नामेंट के लिए ली, लेकिन निजी स्वार्थ के चलते टीम वहाँ मैच खेलने ही नहीं पहुँची। अब इस मामले को लेकर रेल कर्मचारियों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

क्या है पूरा मामला?

छबड़ा के हिंदुस्तान क्रिकेट क्लब द्वारा 13 से 23 जनवरी तक टी-20 क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के लिए कोटा रेल मंडल की टीम को आमंत्रित किया गया था। रेलवे प्रशासन ने खेल प्रोत्साहन के तहत टीम के 15 खिलाड़ियों की 13 से 23 जनवरी तक स्पेशल लीव (Special Leave) मंजूर की थी।

क्वार्टर फाइनल में 'नो-शो', प्रतिद्वंद्वी को मिली वॉकओवर

रेलवे टीम ने 16 जनवरी को अपना पहला मैच जीता और उसे 18 जनवरी को क्वार्टर फाइनल खेलना था। आयोजन समिति के सफीक खान ने पुष्टि की कि रेलवे टीम उस दिन मैदान पर पहुँची ही नहीं। इसके चलते प्रतिद्वंद्वी टीम (इंद्र देवी सिसोदिया क्लब, गुना) को बिना खेले ही विजेता घोषित कर दिया गया।

निजी स्वार्थ या लालच का अंदेशा?

रेल कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि टीम के कुछ प्रमुख खिलाड़ी किसी 'निजी स्वार्थ' या अन्यत्र मिलने वाले 'वित्तीय लाभ' के चलते छबड़ा की जगह कहीं और मैच खेलने चले गए। हैरानी की बात यह है कि जब 18 जनवरी को ही टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई थी, तो नियमों के मुताबिक खिलाड़ियों को अगले दिन ड्यूटी जॉइन करनी चाहिए थी, लेकिन सभी खिलाड़ी 23 जनवरी तक स्पेशल छुट्टी का मजा लेते रहे।

जिम्मेदार पदों पर बैठे खिलाड़ी भी शामिल

इस टीम की कमान और प्रबंधन उन हाथों में है जो रेलवे में जिम्मेदार पदों पर तैनात हैं:

  • जीतू सिंह (कप्तान): कैरिज एंड वैगन विभाग में हेल्पर।

  • कॉलिन वेस्टन: टीएनसी (TNC)।

  • अमित सिंह (टीम मैनेजर): मिल राइट विभाग में कार्यालय अधीक्षक व सीनियर प्लेयर।

गौरतलब है कि कोटा मंडल की यह टीम साल 2023 और 2024 में इसी प्रतियोगिता में उपविजेता रही थी, ऐसे में इस साल मैच छोड़ने के पीछे की वजहों ने रेलवे की साख पर भी सवाल खड़े किए हैं।

अनुशासन पर सवाल

रेलवे अपने खिलाड़ियों को अभ्यास और मैच के लिए विशेष अवकाश प्रदान करता है ताकि विभाग का नाम रोशन हो सके। लेकिन इस तरह सरकारी छुट्टियों का दुरुपयोग कर निजी हितों को प्राथमिकता देना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। अब देखना यह है कि क्या मंडल रेल प्रशासन इन खिलाड़ियों से इस 'लापता' होने का हिसाब माँगेगा?


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