गंगापुर सिटी | शहर की सफाई व्यवस्था अब पूरी तरह 'वेंटिलेटर' पर आ गई है। नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बाद अब घर-घर कचरा संग्रहण करने वाली गाड़ियों (ऑटो टिपर) ने भी चक्का जाम कर दिया है। करोड़ों रुपए का भुगतान बकाया होने के कारण संचालकों ने हाथ खड़े कर दिए हैं, जिससे पूरे गंगापुर सिटी के सभी 60 वार्डों में कचरा उठना बंद हो गया है।
ऑटो टिपर प्रोजेक्ट के इंचार्ज राजवीर सिंह जाट ने बताया कि नगर परिषद और सरकार पर उनका लगभग 2 करोड़ 97 लाख रुपए का भुगतान बकाया है।
नाममात्र का भुगतान: पिछली हड़ताल के दौरान प्रशासन ने आश्वासन दिया था, लेकिन करोड़ों के बकाए के बदले मात्र 10 लाख रुपए ही दिए गए।
डीजल संकट: डीजल सप्लायर का भी करीब 20 लाख रुपए का भुगतान अटका हुआ है, जिसके चलते उसने अब और तेल देने से साफ मना कर दिया है।
इंचार्ज ने बताया कि भुगतान न होने का सबसे बुरा असर ड्राइवरों और हेल्परों पर पड़ रहा है। पिछले 4 महीनों से उन्हें वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। गाड़ियों के मेंटेनेंस और कर्मचारियों की सैलरी के अभाव में अब काम जारी रखना असंभव हो गया है।
संचालकों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर एडीएम (ADM) और एसडीएम (SDM) को पहले ही अल्टीमेटम दे दिया था। बावजूद इसके, प्रशासन ने कोई ठोस समाधान नहीं निकाला। अब संचालकों ने दो टूक कहा है कि जब तक पूर्ण भुगतान नहीं होता या कोई पुख्ता समाधान नहीं निकलता, तब तक गाड़ियां खड़ी रहेंगी।
सफाई कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश और अब डोर-टू-डोर कचरा गाड़ियों की हड़ताल से गंगापुर सिटी 'कचरा डिपो' में तब्दील होने की कगार पर है। मुख्य सड़कों से लेकर गलियों तक गंदगी का ढेर लग रहा है। प्रशासन की इस बेरुखी से आम जनता में भारी आक्रोश है।
निष्कर्ष: राजस्थान सरकार और स्थानीय प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर इस करोड़ों के बकाए का भुगतान करना चाहिए। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो शहर में भीषण गंदगी और बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो जाएगा।
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