गंगापुर सिटी: सामाजिक कार्यकर्ता देवकीनन्दन जायसवाल ने उठाई जनहित की मांग, न्यायोचित राहत की गुहार!

गंगापुर सिटी: सामाजिक कार्यकर्ता देवकीनन्दन जायसवाल ने उठाई जनहित की मांग, न्यायोचित राहत की गुहार!

 

गंगापुर सिटी/सवाई माधोपुर (राजस्थान): गंगापुर सिटी के सामाजिक कार्यकर्ता देवकीनन्दन जायसवाल ने विभिन्न माननीय अथॉरिटीज़ को संबोधित करते हुए एक याचिका/प्रार्थना प्रस्तुत की है, जिसमें जनहित और न्यायहित में न्यायोचित राहत और आवश्यक आदेश/निर्देश पारित करने की विनम्र प्रार्थना की गई है।

⚖️ 'न्यायोचित राहत' की अपील

प्रार्थी देवकीनन्दन जायसवाल ने अपनी याचिका के (vii) बिंदु में विशेष रूप से यह आग्रह किया है:

"आप उक्त सभी माननीय अथॉरिटीज़ से विनम्र प्रार्थना है कि अन्य कोई न्यायोचित राहत या आदेश/निर्देश जो प्रकरण या प्रकरण की प्रकृति में समीचीन हो, वह भी जनहित व न्यायहित में पारित करने की कृपा की जाए।"

यह प्रार्थना दर्शाती है कि प्रार्थी केवल संलग्न दस्तावेजों पर आधारित राहत तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे संबंधित प्राधिकरणों से मामले की समग्र प्रकृति को ध्यान में रखते हुए व्यापक और उचित न्याय सुनिश्चित करने का अनुरोध कर रहे हैं।

📑 याचिका के साथ संलग्न महत्वपूर्ण दस्तावेज़

प्रार्थी ने अपनी मांग को पुष्ट करने और संबंधित अथॉरिटीज़ का ध्यान आकर्षित करने के लिए निम्न महत्वपूर्ण दस्तावेज़ संलग्न किए हैं:

  1. माननीय LSGD/DLB राजस्थान के उक्त संबंधित आदेश दिनांक 24.07.2025 की प्रति।

  2. माननीय UDH विभाग के उक्त संबंधित सर्कुलर दिनांक 06.06.2025 की प्रति।

  3. माननीय DLB के उक्त संबंधित आदेश/निर्देश दिनांक 05/07/2008 की प्रति।

  4. माननीय अपेक्स (सुप्रीम) न्यायालय द्वारा पारित संबंधित विनिश्चय की समाचार प्रति

इन संलग्नकों से स्पष्ट होता है कि यह मामला स्थानीय स्वशासन विभाग (LSGD), स्वायत्त शासन विभाग (DLB), शहरी विकास एवं आवास (UDH) और माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों से संबंधित है, जो किसी महत्वपूर्ण प्रशासनिक या कानूनी मुद्दे को उठाता है।

Public Interest Policy Recommendation -cum- Combined Counter-Representation.

सेवा में,
1. परम माननीय यशस्वी मुख्यमंत्री महोदय जी, राजस्थान सरकार, जयपुर (राज०)।

2. माननीय निदेशक सह विशेष सचिव महो०जी, स्थानीय निकाय निदेशालय एवं स्थानीय स्वशासन विभाग, राजस्थान सरकार, जयपुर (राज०)।

3. माननीय सेक्रेटरी महो०जी, स्थानीय स्वशासन विभाग, राजस्थान सरकार, जयपुर (राज०)।

4. माननीय प्रिंसिपल सेक्रेटरी महो०जी, शहरी विकास एवं आवासन विभाग, राजस्थान सरकार, जयपुर (राज०)।

विषय -: सड़क पुनर्निर्माण नीति एवं जनहित संरक्षण के संबंध में प्रार्थनीय अनुशंसाएँ।

संदर्भ -:
माननीय LSGD/DLB राजस्थान के आदेश संख्या - F55( )CE/DLB/2025/43842 - 44157 दिनांक 24.07.2025
                    एवं
माननीय UDH विभाग के सर्कुलर CE(HQ)/UDH/Milling & Recycling/2025-13934 -7651375 दिनांक 06.06.2025 के संदर्भ में।

मान्यवर महोदय जी,
   उक्त संदर्भ में निवेदन है कि उक्त आदेश दिनांक 24 जुलाई 2025 एवं उक्त संबंधित सर्कुलर दिनांक 6 जून 2025 में मिल एण्ड फिल पाॅलिसी के तहत मिलिंग और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) तकनीक के उपयोग का मुख्य फोकस बिटुमिनस (डामर) सड़कों के लिए उल्लेखित किया गया है, किन्तु सीमेंट-कंक्रीट (CC) सड़कों के लिए स्पष्ट व पर्याप्त दिशा निर्देश उपलब्ध नहीं हैं।
   मान्यवर जी, ज्ञातव्य हो कि राज्य में विशेषकर कॉलोनियों में अधिकांश सड़कें सीमेंट-कंक्रीट की सीसी सड़कें बनी हुई हैं और बनाई जाती हैं।

माननीय महो०जी, गंगापुर सिटी सहित लगभग पूरे प्रदेश राजस्थान में पुरानी सड़कों को नॉन पैचेवल या मिसिंग लिंक सड़कें बताकर पुनर्निर्माण या नए निर्माण के नाम पर प्रायः पुरानी सड़कों के ऊपर ही नई ऊंची सड़कों का निर्माण कर दिया जाता है।
   अधिकांश संवेदकों/ठेकेदारों द्वारा पुरानी सड़कों की परतें (Layers) / स्लैब हटाए बिना ही पुरानी सड़कों के ऊपर ही नई ऊंची सड़कों का निर्माण अर्थात ओवरले करने के परिणामस्वरूप जनता के मकानों-दुकानों की प्लिन्थ लेवल डाउन (कम) या नगण्य हो जाती है, जिससे —
* उनके मकानों/दुकानों की वैल्यूएशन (कीमत) घटती है,

* उनके मकानों/प्रतिष्ठानों में बरसात का पानी व कीचड़ भरने की गंभीर समस्या उत्पन्न होती है, और

* नागरिकों की सुरक्षा, सुविधा व जीवन-स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

इनके अतिरिक्त -
* बिना लेयर/स्लैब - रिमूवल के नया ओवरले पुराने कमजोर सड़क बेस पर टिकाऊ नहीं होता है और सड़कें जल्दी ही क्रैक/पॉटहोल हो जाती हैं।

* ओवरले की वजह से जमीन में दबी हुई यूटिलिटी लाइनें (Water, Sewer, Electricity, Gas, OFC आदि) और अधिक गहराई में दब जाती हैं, जिससे भविष्य में उनकी मरम्मत, विस्तार या प्रतिस्थापन कठिन और महंगा हो जाता है।

* सड़कों की ऊंचाई बढ़ने से ड्रेनेज बाधित होता है, जिसके कारण -
* ० वर्षा जल अपने प्राकृतिक गंतव्य (नदी, नालों, तालाब आदि) तक नहीं पहुंच पाता है और सड़कों पर जलभराव होता है, जिसके परिणामस्वरूप -
* ▸ आवागमन बाधित होता है,
* ▸ दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है और घटित भी होती हैं,
* ▸ दुर्गंध, गंदगी व बीमारियां फैलती हैं,
* ▸ सड़कें समय से पहले क्षतिग्रस्त होकर टूट जाती हैं, जिसकी परिणिति सड़कों का सरकारी पुनर्निर्माण व्यय बढ़ता है।
* ० ओवरले के कारण प्राकृतिक जल-निर्गमन बाधित होने से भू-जल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।

— तथा ओवरले और उक्त परिणामिक समस्याएं राजस्थान राज्य के अधिकांश शहरी, ग्रामीण एवं अन्य क्षेत्रों में व्याप्त हैं।
   जबकि रोड कंस्ट्रक्शन प्रावधानों एवं राजस्थान सरकार, निदेशालय स्थानीय निकाय विभाग, राज० जयपुर के आदेश / निर्देश क्रमांक-  एफ 56 ( ) पीए/एसई/ डीएलबी/08/2170 - 2352 दिनांक 05/07/2008 के निर्देशानुसार किसी सड़क के पुन:निर्माण के लिये पुरानी सड़क की परतों (Layers)/स्लैब को हटाकर अधिकतम पुरानी सड़क की ऊंचाई के बराबर ही नई सड़क का निर्माण किया जाना अर्थात पुनर्निर्मित सड़क का फाइनल रोड लेवल पुरानी सड़क के फाइनल रोड लेवल से अधिक नहीं किया जाना अनिवार्य है।
   माननीय अपेक्स (सुप्रीम) न्यायालय भी सड़क की खुदाई किये बगैर पुरानी सड़क के ऊपर नई सड़क की ढलाई नहीं करने सम्बन्धी विनिश्चय पारित कर चुका है।

जहां तक मेरी समझ है हमारे माननीय यशस्वी मुख्यमंत्री जी की भी स्पष्ट मंशा यही है कि — 'अब सड़कों की ऊँचाई बढ़ाई न जाए, पुरानी व क्षतिग्रस्त सड़कों की परतें/स्लैब हटाने के बाद ही नई सड़कें बनाई जाए -  चाहे सड़कें डामर की बनी हो या फिर सीमेंट-कंक्रीट की, तथा पुनर्निर्मित सड़कों का फाइनल रोड लेवल पुरानी सड़कों के फाइनल रोड लेवल से अधिक ना हो, ताकि लोगों के मकानों प्रतिष्ठानों की प्लिन्थ लेवल नहीं घटे, जिससे उनके घरों प्रतिष्ठानों में बरसात का पानी नहीं घुसे और उनकी संपत्ति का मूल्य बरकरार रहे।'

PRAYERS / Recommendations :

अतः आप माननीय मुख्यमंत्री महो०जी (राजस्थान सरकार), माननीय निदेशक सह विशेष सचिव महो०जी (DLB), माननीय सेक्रेटरी महो०जी (LSGD) एवं माननीय प्रिंसिपल सेक्रेटरी महो०जी (UDH) से करबद्ध विनम्र प्रार्थना है कि कृपया आप सभी अपने-अपने स्तर पर आवश्यक एवं यथोचित कार्यवाही कर यह सुनिश्चित करने/करवाने की कृपा करें कि —
(i) आप उक्त सभी माननीय अथॉरिटीज़ से विनम्र प्रार्थना है कि कृपया आप उक्त आदेश दिनांक 24-07-2025 एवं उक्त सर्कुलर दिनांक 06-06-2025 के अनुपालन हेतु संबंधित सक्षम सरकारी कार्यान्वयन एवं नीति निर्धारण विभागों तथा ULBs को ऐसा समेकित व बाध्यकारी ORDER / DIRECTION / SOP - cum - Mandatory Guidelines (निर्देश) जारी करें, जिसमें बिटुमिनस (डामर) सड़कें ही नहीं, बल्कि सीमेंट-कंक्रीट (CC) सड़कें भी स्पष्ट रूप से सम्मिलित हों तथा बिटुमिनस एवं CC सड़कों सहित सभी प्रकार की सड़कों के लिए -
* ओवरले पर निषेध,
* पुरानी लेयर्स/स्लैब हटाकर ही पुनर्निर्माण,
* पुनर्निर्मित सड़कों का फाइनल रोड लेवल पुरानी सड़कों के फाइनल रोड लेवल से अधिक नहीं हो,
* ड्रेनेज एवं मैनहोल लेवल का समुचित संरेखण (alignment), एवं
* रीसाइक्लिंग/री-यूज़ व डिस्पोज़ल की वैधानिक एवं पर्यावरण-सम्मत प्रक्रिया,
                   — का उल्लेख हो।

   उक्त हेतु, कृपया आप उक्त सभी माननीय अथॉरिटीज़ अपने-अपने स्तर पर UDH/LSGD/PWD/PHED/PRD एवं अन्य संबद्ध विभागों को समन्वयी आदेश/निर्देश/परिपत्र/परामर्श/एडवाइजरी जारी करने की कृपा करें,

विशेषकर माननीय UDH विभाग से अनुरोध है कि वह PWD, PHED, PRD तथा LSGD के साथ समन्वय स्थापित कर, उपर्युक्त जनहितकारी एकरूप नीति एवं तकनीकी मानक राज्य-व्यापी स्तर पर लागू करने/कराने की कृपा करें, ताकि पूरे प्रदेश में एकरूप जनहितकारी नीति लागू हो।
 
(ii) आप उक्त सभी माननीय अथॉरिटीज़ से प्रार्थना है कि LSGD/DLB के दिनांक 05-07-2008 के निर्देशों के अनुरूप यह सुनिश्चित करने/करवाने की कृपा की जावे कि बिटुमिनस व सीसी सड़कों सहित सभी प्रकार की सड़क पुनर्निर्माण (Re-construction) में नई सड़क का Final Road Level, पुरानी सड़क के अधिकतम लेवल से ऊपर न जाए और इसके लिए पुरानी सड़क की लेयर्स/स्लैब-रिमूवल प्रक्रियाएँ, ORDER / DIRECTION / SOP में अंकित करने की कृपा की जाए।
   यदि अपवादस्वरूप किसी क्षेत्र में किसी सड़क पर यथार्थ तकनीकी एवं व्यवहारिक कारणों से ओवरले किया जाना अपरिहार्य हो तो प्रार्थना है कि ऐसी स्थिति में —
* ओवरले के तकनीकी और अपरिहार्य कारणों को अधिकृत सरकारी अभिलेखों में दर्ज कर सार्वजनिक डोमेन/पोर्टल पर भी उपलब्ध कराया जाए,
* प्रभावित संपत्ति के मालिक/ उत्तराधिकारी/उपभोक्ता को पूर्व लिखित सूचना दी जाए तथा ओवरले कार्य से पूर्व उन्हें उनकी आपत्तियाँ/सुझाव दर्ज कराने का अवसर प्रदान किया जाए,
* ओवरले की वजह से होने वाली समस्याओं का समुचित समाधान/परिहार/उपाय किया जाए,
* ओवरले की वजह से प्रभावित संपत्ति मालिकों/उत्तराधिकारियों को उनकी संपत्ति की क्षति के अकॉर्डिंग प्रभावी, न्यायसंगत एवं पर्याप्त Property Depreciation Compensation / Property Reconstruction or Alteration Compensation नियत-समयावधि (Time-bound) में दिया जाना सुनिश्चित किया जाए तथा इसके लिए स्वतंत्र अपीलीय प्राधिकरण/लोक अदालत या अन्य कोई सक्षम व स्वतंत्र विवाद निवारण प्राधिकरण की व्यवस्था भी हो, जो स्वयं भी अपना आदेश/निर्णय नियत-समयावधि में पारित करें और उसकी पालना भी नियत-समयावधि में पूर्ण करवाएं, और
* ओवरले के लिए कम से कम Engineer-in-Chief / समकक्ष उच्च प्राधिकारी अथवा उनसे उच्च रैंक के सक्षम अधिकारियों से पूर्व-लिखित कारण-दर्शित अनुमति लिया जाना अनिवार्य किया जाए।

(iii) आप उक्त सभी माननीय अथॉरिटीज़ से यह सुनिश्चित करने/करवाने की विनम्र प्रार्थना है कि सड़क पुनर्निर्माण से पूर्व संबंधित अधिकृत/कार्यकारी सरकारी विभाग/निकाय/इकाई/एजेंसी के अभियंताओं/अधिकारियों द्वारा संयुक्त लेवल-सर्वे (RL / FFL / PL / ड्रेनेज लेवल सहित अन्य सभी आवश्यक लेवल्स) किया जाए तथा सड़क पुनर्निर्माण कार्य पूर्ण होने पर Engineer-in-Charge (Executive Engineer / Equivalent Authorized Officer) अर्थात् संबंधित अधिकृत/कार्यकारी सरकारी विभाग/निकाय/इकाई/एजेंसी के प्रभारी अभियंता अथवा सक्षम अधिकृत/उत्तरदायी समकक्ष या उच्च अधिकारी के प्रमाणन (Certification) के आधार पर सरकारी Compliance Certificate लिया जाए — कि Final Road Level (FRL) बढ़ा नहीं है तथा Compliance Certificate को संबंधित सरकारी विभाग/निकाय/इकाई/एजेंसी (ULB/PWD/PRD/अन्य संबंधित सरकारी विभाग या इकाई) के बिल-पासिंग/पेमेंट से अनिवार्य रूप से लिंक किया जाए और इसे बिल-पासिंग/पेमेंट की अपरिहार्य पूर्वशर्त (mandatory pre-condition) बनाया जाए।
   यदि Compliance Certificate झूठा साबित होता है तो सर्टिफ़िकट जारीकर्ता पर लागू सेवा-नियमों/विनियमों एवं भ्रष्टाचार सहित प्रभावी व लागू कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत कार्यवाही/समानांतर आपराधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

(iv) आप उक्त सभी माननीय अथॉरिटीज़ से विनम्र प्रार्थना है कि डीफेक्ट लायबिलिटी पीरियड, कॉन्ट्रैक्ट कंडीशन्स तथा सड़क निर्माण संबंधी नियम, निर्देश एवं मानक-मापदंडों के अनुसार, यदि कोई संवेदक/ठेकेदार
(क) नियमविरुद्ध ओवरले/ऊँचाई बढ़ाता है, अथवा
(ख) नियमों एवं निर्धारित गुणवत्ता व तकनीकी मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण सड़क का निर्माण नहीं करता है, तो उस पर —
* पेनल्टी (Proportionate to Violation),
* परफॉर्मेंस सिक्योरिटी की जप्ती,
* ब्लैकलिस्टिंग & Future Tender Disqualification तथा
* समयबद्ध (निश्चित अवधि में) एवं नियमों व मानकों के अनुरूप पुनर्निर्माण,
           — अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।

(v) आप उक्त सभी माननीय अथॉरिटीज़ से प्रार्थना है कि पिछले तीन वर्षों में निर्मित की गई उन सड़कों की Third-Party Evaluation by Independent/Accredited Agency (जैसे- NABL Accredited Laboratories अथवा CPWD / State PWD / Other Government Empanelled Independent Agencies) से जांच कराई जाए जिनकी शिकायतें दर्ज हैं, तथा जहाँ उल्लंघन सिद्ध हो वहाँ —
* संबंधित ठेकेदार / संवेदक से रेक्टिफिकेशन एवं
* जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्यवाही,
              — सुनिश्चित की जाए।

(vi) आप उक्त सभी माननीय अथॉरिटीज़ से विनम्र प्रार्थना है कि नागरिकों हेतु Time-bound Grievance Redressal Mechanism संबंधित सरकारी विभाग/निकाय/इकाई/एजेंसी (ULB/PWD/PRD/अन्य संबंधित सरकारी विभाग या इकाई) स्तर पर एवं जिला स्तर पर विधिवत अधिसूचित एवं लागू किया जाए, तथा राज्य - स्तरीय Unified Online Tracking Portal/Helpline उपलब्ध कराया जाए, ताकि नागरिकों को पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध शिकायत निवारण की सुविधा प्राप्त हो सके।
   प्रार्थना है कि शिकायत निवारण प्रणाली को वास्तविक एवं निष्पक्ष बनाने हेतु यह सुनिश्चित किया जाए कि जिस अधिकारी/विभाग/निकाय/इकाई/एजेंसी के निर्णय/कार्य के विरुद्ध शिकायत हो, उस अधिकारी / उस विभागीय इकाई / उस निकाय / उस ऑफिस को शिकायत निस्तारण हेतु नहीं सौंपी जाए, बल्कि शिकायत का निस्तारण उच्च पर्यवेक्षणीय अथवा सक्षम स्वतंत्र प्राधिकारी (Higher Supervisory or Independent Competent Authority) द्वारा किया जाए, ताकि जांच एवं निर्णय निष्पक्ष, तथ्याधारित और वस्तुनिष्ठ हों तथा निर्णय की पालना भी निश्चित समय अवधि में सुनिश्चित की जाए।
   यदि किसी शिकायत का निस्तारण प्रथम Higher Supervisory/Independent Authority द्वारा नियत समय-सीमा में नहीं किया जाता है अथवा अधूरा, असंगत या तथ्यात्मक/विधिक रूप से गलत या त्रुटिपूर्ण किया जाता है, तो —
(A) यदि निस्तारण समय-सीमा में नहीं हुआ है तो → ऐसी शिकायत निस्तारण हेतु अगले उच्च स्तर के सक्षम प्राधिकारी (Next Higher Competent Authority) को स्वतः अग्रेषित (automatic escalation) हो,
(B) यदि शिकायतकर्ता को निस्तारण अधूरा/असंगत/गलत या त्रुटिपूर्ण प्रतीत हो तो → उसे Revision / Appeal / Statutory Appeal करने का अधिकार मिले और प्रकरण स्वतः अगले उच्च प्राधिकारी/अपीलीय प्राधिकारी (Next Higher/Appellate Authority) को प्रेषित हो।
   — ऐसी स्थिति में अगले उच्च प्राधिकारी द्वारा अनिवार्य रूप से निश्चित समय अवधि में शिकायत निस्तारित की जाए तथा निश्चित समय-सीमा में जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन पालना भी सुनिश्चित की जाए।
   साथ ही, शिकायतों एवं उनकी कार्यवाही से संबंधित अभिलेख/रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक डोमेन पर ओपन-एक्सेस रिकॉर्ड्स के रूप में उपलब्ध कराया जाए, ताकि आमजन उनका सहज, स्वतंत्र एवं निर्बाध रूप से अवलोकन कर सकें और पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

(vii) आप उक्त सभी माननीय अथॉरिटीज़ से विनम्र प्रार्थना है कि अन्य कोई न्यायोचित राहत या आदेश/निर्देश जो प्रकरण या प्रकरण प्रकृति में समीचीन हो, वह भी जनहित व न्यायहित में पारित करने की कृपा की जाए।

संलग्न -:
1. Attached PDF File Number 1. -
इस Public Interest Policy ... cum ... Representation. की पीडीएफ।

2. Attached PDF File Number 2. -
माननीय LSGD/DLB राजस्थान के उक्त संबंधित आदेश दिनांक 24.07.2025 की प्रति।

3. Attached PDF File Number 3. -
माननीय UDH विभाग के उक्त संबंधित सर्कुलर दिनांक 06.06.2025 की प्रति।

4. Attached PDF File Number 4. -
 माननीय DLB के उक्त संबंधित आदेश / निर्देश दिनांक 05/07/2008 की प्रति।

5. Attached PDF File Number 5. -
माननीय अपेक्स (सुप्रीम) न्यायालय द्वारा पारित संबंधित  विनिश्चय की समाचार प्रति।

                        सत्यमेव जयते

📍 प्रार्थी का परिचय

देवकीनन्दन जायसवाल

(सामाजिक कार्यकर्ता)

वार्ड नं०- 12, कल्याण जी रोड,

मीणा कॉलोनी, मिर्जापुर,

गंगापुर सिटी - स०मा० (राजस्थान),

पिन कोड - 3222 01.

 

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