गंगापुर सिटी : कोटा मंडल का 'अजीब' कारनामा: रतलाम से कोटा 'खाली' आ रहे लोको पायलट, फिर वहीं से चला रहे ट्रेन; रेलवे को लग रहा लाखों का चूना

गंगापुर सिटी : कोटा मंडल का 'अजीब' कारनामा: रतलाम से कोटा 'खाली' आ रहे लोको पायलट, फिर वहीं से चला रहे ट्रेन; रेलवे को लग रहा लाखों का चूना

कोटा मंडल का 'अजीब' कारनामा: रतलाम से कोटा 'खाली' आ रहे लोको पायलट, फिर वहीं से चला रहे ट्रेन; रेलवे को लग रहा लाखों का चूना

कोटा /गंगापुर सिटी : भारतीय रेलवे में जहाँ एक-एक पैसे की बचत और मैनपावर के सही इस्तेमाल पर जोर दिया जाता है, वहीं कोटा रेल मंडल में अधिकारियों की 'अदूरदर्शिता' और कर्मचारी संगठनों के कथित दबाव के चलते नियमों को ताक पर रखकर ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। मामला लोको पायलटों (क्रू) के अनावश्यक उपयोग और रेलवे पर पड़ रहे अतिरिक्त वित्तीय बोझ से जुड़ा है।

स्पेयर (खाली) यात्रा और फिर वही ट्रेन: क्या है पूरा माजरा?

रनिंग स्टाफ से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में होली स्पेशल के रूप में चल रही कई साप्ताहिक ट्रेनों (जैसे उधना-अयोध्या, मुंबई-काठगोदाम, मुंबई-कानपुर और वडोदरा-मऊ) के संचालन में एक अजीब तरीका अपनाया जा रहा है।

  • रतलाम से कोटा तक: इन ट्रेनों को रतलाम के लोको पायलट चलाकर कोटा लाते हैं।

  • हैरान करने वाली बात: इसी दौरान गंगापुर के लोको पायलट इन्हीं ट्रेनों में रतलाम से कोटा तक 'स्पेयर' (यात्री के रूप में) बैठकर आते हैं।

  • कोटा से आगे: कोटा पहुँचने के बाद, जो लोको पायलट 'स्पेयर' आए थे, वे ही उसी ट्रेन को कोटा से गंगापुर तक चलाकर ले जाते हैं।

वापसी में भी यही प्रक्रिया दोहराई जाती है। रनिंग स्टाफ का कहना है कि यदि गंगापुर का क्रू सीधे रतलाम से ट्रेन चलाकर लाए, तो एक अतिरिक्त क्रू की बचत हो सकती है और रेलवे का आर्थिक नुकसान भी बचेगा।

दो की जगह तीन क्रू का खेल

यही स्थिति साप्ताहिक वेरावल-बनारस (12945) ट्रेन में भी देखी जा रही है। नियमानुसार इस ट्रेन को रतलाम और गंगापुर के क्रू द्वारा आगरा तक आसानी से पहुँचाया जा सकता है, लेकिन कोटा मंडल के रनिंग स्टाफ को 'फायदा' पहुँचाने के लिए इसमें रतलाम, कोटा और गंगापुर के तीन अलग-अलग क्रू लगाए जा रहे हैं।

प्रमुख प्रभावित ट्रेनें:

ट्रेन संख्या नाम वर्तमान स्थिति
09097 उधना-अयोध्या स्पेशल अनावश्यक क्रू बदलाव और स्पेयर रनिंग
09075 मुंबई-काठगोदाम स्पेशल संसाधनों का दुरुपयोग
12945 वेरावल-बनारस एक्सप्रेस दो की जगह तीन क्रू से संचालन

रेलवे को दोहरा नुकसान

विशेषज्ञों और स्टाफ के अनुसार, इस व्यवस्था से दो स्तर पर नुकसान हो रहा है:

  1. वित्तीय हानि: लोको पायलटों को 'स्पेयर' यात्रा का भी भुगतान करना पड़ता है, जिससे रेलवे पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ता है।

  2. स्टाफ की कमी: एक ही ट्रेन में दो-दो क्रू (एक वर्किंग और एक स्पेयर) उलझे रहने से अन्य ट्रेनों के लिए स्टाफ की कमी बनी रहती है।

चर्चा का विषय: रेलवे गलियारों में इस बात की जबरदस्त चर्चा है कि कर्मचारी संगठनों के दबाव में अधिकारी नियमों के विरुद्ध जाकर कम दूरी पर क्रू बदल रहे हैं, जिससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है बल्कि सरकारी खजाने को भी चूना लग रहा है।


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