Rail News: गंगापुर रनिंग रूम में फर्नीचर खरीद में एक बड़े घपले की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, मंडल मुखिया की नाराजगी के बाद एक मुख्य लॉबी निरीक्षक (सीएलआई) ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली है, जबकि उनकी सेवानिवृत्ति में अभी लगभग छह महीने शेष थे।
विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि कुछ दिनों पहले मंडल मुखिया ने गंगापुर रनिंग रूम का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान, मंडल मुखिया रनिंग रूम में रखे एक फर्नीचर पर बैठे थे। जैसे ही वे बैठे, वह फर्नीचर अचानक धंस गया और वे गिरते-गिरते बचे। ध्यान से देखने पर फर्नीचर काफी पुराना और टूटा हुआ पाया गया। इस घटना से मंडल मुखिया बेहद नाराज हुए और उन्होंने मौके पर मौजूद एलआई (लॉबी निरीक्षक) को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने एलआई को तत्काल प्रभाव से अपना हिसाब-किताब करने या सहायक के पद पर पदावनत करने की चेतावनी दी।
फर्जीवाड़ा उजागर, नया फर्नीचर बताकर किया गोलमाल
मंडल मुखिया की नाराजगी के बाद जब अधिकारियों ने इस मामले की जांच की, तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। जांच में पता चला कि कुछ समय पहले इस फर्नीचर को नया खरीदा हुआ दर्शाया गया था, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत थी।
15 दिन में मंजूर हुआ वीआरएस, अधिकारियों पर संदेह
इस घटना के महज चार दिन बाद ही संबंधित सीएलआई ने वीआरएस के लिए आवेदन कर दिया, और आश्चर्यजनक रूप से, उनका वीआरएस ठीक 15 दिनों में स्वीकार भी हो गया। सूत्रों का मानना है कि इस पूरे प्रकरण में कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। इतनी जल्दी वीआरएस स्वीकार होने के पीछे यही कारण माना जा रहा है। सूत्रों ने यह भी आशंका जताई है कि लोबी सहित अन्य विभागों में भी इसी तरह के गोलमाल हो सकते हैं। यह मामला सामने आने के बाद से रेलवे कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
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