कोटा। पश्चिम-मध्य रेलवे में कोटा मंडल ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कबाड़ (स्क्रैप) के निपटान में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मंडल ने इस वर्ष सबसे ज्यादा कबाड़ बेचकर 47.15 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया है, जो कि रेलवे द्वारा निर्धारित लक्ष्य से लगभग 18 प्रतिशत अधिक है।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि कोटा मंडल की स्क्रैप आय में पिछले तीन वर्षों से निरंतर और प्रभावशाली बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार:
2023-24: 18.30 करोड़ रुपये
2024-25: 36.60 करोड़ रुपये
2025-26: 47.15 करोड़ रुपये (ताजा उपलब्धि)
इस वित्तीय वर्ष में मंडल ने कुल 14,471 मीट्रिक टन स्क्रैप सामग्री का सफलतापूर्वक निस्तारण किया। इस कचरे में रेलवे के कंडम हो चुके भारी उपकरण और पटरियां शामिल थीं। बेची गई मुख्य सामग्री में शामिल हैं:
इंजीनियरिंग सामान: पुरानी रेल पटरियाँ, फिशप्लेट, फास्टनर और आयरन स्लीपर।
मैकेनिकल पार्ट्स: बोगी फ्रेम, कपलर, पुराने कोच एवं वैगन के पुर्जे।
अन्य सामग्री: अनुपयोगी विद्युत केबल, पुराने ट्रक, निर्माण सामग्री, लकड़ी के बॉक्स और स्टेशनों का पुराना फर्नीचर।
रेलवे की इस "जीरो स्क्रैप" पॉलिसी का दोहरा लाभ मिल रहा है। एक तरफ जहां यार्ड, स्टेशनों और वर्कशॉप में पड़े कबाड़ को हटाकर परिसर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बेकार पड़ी चीजों से रेलवे को करोड़ों रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है। इस उपलब्धि के लिए मुख्यालय ने कोटा मंडल की वाणिज्य और इंजीनियरिंग टीम की सराहना की है।
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