कोटा। रेलवे के टेलीकॉम विभाग में कार्यरत महिला कर्मचारी रुबीना बानो ने विभाग के सुपरवाइजरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रुबीना का आरोप है कि उन्हें न केवल मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, बल्कि उनके साथ कार्यस्थल पर भेदभावपूर्ण व्यवहार भी किया जा रहा है। मामला इतना बढ़ गया कि तनाव के कारण रुबीना की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें रेलवे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
रुबीना ने वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं टेलीकॉम इंजीनियर (Sr. DSTE) को लिखित शिकायत देकर अपनी आपबीती सुनाई है:
ड्यूटी में भेदभाव: पहले रुबीना स्टोर में काम करती थीं, लेकिन पिछले साल सितंबर से उन्हें स्थायी रूप से चौकीदारी (Watchman) की ड्यूटी पर लगा दिया गया है।
अमानवीय व्यवहार: रुबीना का आरोप है कि उन्हें 12 घंटे की निरंतर ड्यूटी के दौरान भोजन (लंच) करने तक की अनुमति नहीं दी जाती। साथ ही उनसे चौकीदारी के अलावा जबरन स्टोर और कार्यालय का काम भी कराया जाता है।
धमकी भरा रवैया: सुपरवाइजरों द्वारा उन्हें बार-बार ड्यूटी से हटाने, गैंग (फील्ड ड्यूटी) में भेजने और अनुपस्थित (Absent) मार्क करने की धमकियां दी जा रही हैं।
रुबीना के अनुसार, मार्च महीने से लगातार हो रहे अपमानजनक व्यवहार और मानसिक तनाव के कारण 16 अप्रैल को उनकी अचानक तबीयत खराब हो गई।
उन्हें तुरंत रेलवे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका उपचार चल रहा है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें जांच के लिए सुधा अस्पताल भी रेफर किया।
महिला कर्मचारी ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत कई बार अपने डिपो इंचार्ज से की थी, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया। अधिकारियों की इसी चुप्पी ने सुपरवाइजरों के हौसले और बढ़ा दिए।
अब रुबीना ने उच्च अधिकारियों से इस मामले में निष्पक्ष जांच और आरोपी सुपरवाइजरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। कोटा रेल मंडल में हाल के दिनों में कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार के बढ़ते मामले रेल प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।
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