कोटा, राजस्थान: राजस्थान हाई कोर्ट ने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के अधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी किया है। यह नोटिस एक जवान रणवीर सिंह को नौकरी और वेतन नहीं देने के मामले में जारी किया गया है। कोर्ट के आदेश के बावजूद आरपीएफ ने जवान को न तो नौकरी पर लिया और न ही उसे वेतन दिया।
मामले का विवरण:
रणवीर सिंह को लगभग 25 साल पहले मेडिकल में फेल होने के कारण आरपीएफ से बर्खास्त कर दिया गया था। नियमों के अनुसार, उन्हें किसी अन्य विभाग में नौकरी दी जानी चाहिए थी। लगभग 15 साल की कानूनी लड़ाई के बाद, हाई कोर्ट ने रणवीर के पक्ष में फैसला सुनाया और आरपीएफ को उन्हें दोबारा नौकरी पर लेने और वेतन देने का आदेश दिया।
आरपीएफ की अवहेलना:
हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद, आरपीएफ ने इसका पालन नहीं किया। रणवीर सिंह ने दोबारा हाई कोर्ट में याचिका दायर की। लगभग 10 साल की सुनवाई के बाद, हाई कोर्ट ने 22 मार्च को फिर से रणवीर के पक्ष में फैसला सुनाया और आरपीएफ को नौकरी और वेतन देने का आदेश दिया।
सेवा से सेवानिवृत्ति:
रणवीर सिंह ने अदालत को बताया कि नौकरी के इंतजार में 31 जुलाई को उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख भी निकल गई। इसके बावजूद, उन्हें सेवा में मानते हुए कोई लाभ नहीं दिया गया।
हाई कोर्ट की टिप्पणी:
हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अदालत के आदेश की जानबूझकर अवज्ञा के लिए जुर्माना क्यों न लगाया जाए। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।
पहले भी हुई है ऐसी घटना:
यह पहली बार नहीं है जब रेलवे ने अदालत के आदेश की अवहेलना की है। इससे पहले, तत्कालीन डीआरएम मनीष तिवारी ने भी अदालत के आदेश का पालन नहीं किया था, जिसके कारण उनकी कार और कार्यालय को कुर्क करने का आदेश दिया गया था।
अधिकारियों की चुप्पी:
इस मामले में वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त ए नवीन कुमार से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
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