कोटा रेल मंडल की ऐतिहासिक उपलब्धि: 1577 करोड़ का अब तक का सर्वाधिक राजस्व, 180 किमी/घंटा की रफ्तार से ट्रायल

कोटा रेल मंडल की ऐतिहासिक उपलब्धि: 1577 करोड़ का अब तक का सर्वाधिक राजस्व, 180 किमी/घंटा की रफ्तार से ट्रायल

 

कोटा। कोटा रेल मंडल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अपनी कार्यकुशलता और नवाचार के दम पर अब तक की सबसे अधिक आय अर्जित कर एक नया इतिहास रच दिया है। मंडल ने इस वर्ष 1577.56 करोड़ रुपये की कुल आय दर्ज की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.22 प्रतिशत अधिक है।

राजस्व और यात्री संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि

कोटा मंडल के राजस्व और यात्री आंकड़ों में इस वर्ष उल्लेखनीय सुधार देखा गया है:

  • कुल आय: ₹1577.56 करोड़ (अब तक की सर्वाधिक)।

  • यात्री आय: ₹580.62 करोड़ (4.68% की वृद्धि)।

  • संड्री राजस्व: ₹51.04 करोड़ (पिछले वर्ष से 24.17% अधिक)।

  • यात्रियों की संख्या: कुल 316.86 लाख यात्रियों ने सफर शुरू किया, जो पिछले वर्ष से 7.37% अधिक है।

माल लदान: नए गुड्स शेड से बढ़ा मुनाफा

मंडल ने माल लदान (Freight) में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 7.335 मिलियन टन लदान किया, जिससे लगभग 910 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।

  • नया ट्रैफिक: सुंदलक, सवाई माधोपुर और झालरापाटन गुड्स शेड से नए माल ट्रैफिक की सफल शुरुआत हुई।

  • गति शक्ति: मंडल ने सुंदलक और मंडलगढ़ में दो नए गति शक्ति कार्गो टर्मिनल भी शुरू किए हैं।

तकनीक और रफ्तार: 'कवच 4.0' और 180 किमी/घंटा ट्रायल

कोटा मंडल अब भारतीय रेलवे की 'हाई स्पीड' बेल्ट का प्रमुख हिस्सा बन चुका है:

  • कवच वर्जन 4.0: मथुरा–कोटा–नागदा खंड के 549 रूट किमी पर कवच प्रणाली कमीशन की गई और 87 इंजनों में ऑनबोर्ड यूनिट लगाई गई।

  • मिशन रफ्तार: 160 किमी/घंटा की गति के लिए ट्रैक और बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया गया। साल भर में 19,394 किलोमीटर हाई स्पीड ट्रायल किए गए, जिसमें अधिकतम 180 किमी/घंटा तक की रफ्तार का सफल परीक्षण शामिल है।

यात्री सुविधा और शिकायत निवारण में नंबर 1

  • त्वरित समाधान: 'रेल मदद' पोर्टल पर कोटा मंडल ने 89.98% उत्कृष्ट फीडबैक के साथ देश भर में नाम कमाया। शिकायतों के निपटारे का औसत समय मात्र 17 मिनट रहा, जो पूरे जोन में सबसे कम है।

  • सुविधा विस्तार: 4 मेमू ट्रेनों में कोचों की संख्या 8 से बढ़ाकर 12 की गई। 7 नए फुट ओवर ब्रिज और 54 स्टेशनों पर दिव्यांगजन सुविधाएं विकसित की गईं। अमृत भारत योजना के तहत स्टेशनों का कायाकल्प भी शुरू हो चुका है।

सुरक्षा और सामाजिक सरोकार

  • दुर्घटनाओं में कमी: सुरक्षा के प्रति सजगता का परिणाम रहा कि दुर्घटनाओं की संख्या 6 से घटकर केवल 1 रह गई।

  • RPF की सक्रियता: "नन्हे फरिश्ते" अभियान के तहत 198 बच्चों को रेस्क्यू किया गया और "अमानत" अभियान में 363 यात्रियों को उनका खोया हुआ सामान वापस लौटाया गया।


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