राजस्थान के बूंदी जिले की हिंडोली नगर पालिका से एक बेहद गंभीर और हाई-प्रोफाइल मामला सामने आया है। हिंडोली नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) जितेंद्र मीणा ने कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री अशोक चांदना के खिलाफ राजकार्य में बाधा पहुंचाने, फोन पर जान से मारने की धमकी देने तथा जातिगत रूप से अपमानित करने का नामजद मुकदमा दर्ज कराया है।
विधायक के खिलाफ मामला दर्ज होने के कारण नियमानुसार इसकी जांच सीआईडी-सीबी (CID-CB) को सौंप दी गई है। यह पूरा विवाद गत 13 अप्रैल का बताया जा रहा है।
हिंडोली थानाधिकारी मुकेश यादव के अनुसार, अधिशासी अधिकारी जितेंद्र मीणा ने पुलिस को दी अपनी रिपोर्ट में बताया कि 13 अप्रैल को कस्बे में ओमप्रकाश सुवालका नाम के एक व्यक्ति द्वारा सरकारी जमीन पर किए गए निर्माण एवं अतिक्रमण को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई चल रही थी। ईओ मीणा मौके पर राजकार्य में व्यस्त थे।
दोपहर करीब ढाई बजे विधायक अशोक चांदना के पीए (PA) रामधन का फोन आया, जिसे व्यस्तता के कारण ईओ रिसीव नहीं कर पाए। इसके बाद मैसेज आया कि पूर्व मंत्री अशोक चांदना बात करेंगे। कुछ देर बाद जब दोबारा फोन आया और ईओ ने उसे रिसीव किया, तो दूसरी तरफ से विधायक अशोक चांदना ने बेहद आक्रामक लहजे में कहा:
"सुनो, मेरे कार्यकर्ता का अब एक भी पत्थर गिरा तो आपकी जड़ें खोद दूंगा!"
शिकायत के अनुसार, जब अधिशासी अधिकारी (EO) ने सफाई देते हुए कहा कि उक्त व्यक्ति ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया है, जिसकी उच्च स्तरीय शिकायतें हैं और उन्हें इसका जवाब देना है, तो विधायक और अधिक भड़क गए।
चांदना ने ईओ को धमकाते हुए आगे कहा:
"अब आप समझ लेना, इनकी दीवार गिरी तो एक न एक दिन आपके ऊपर ही गिरेगी वह दीवार। मैं छोडूंगा नहीं! जो मेरे कांग्रेस के कार्यकर्ता को परेशान करेगा इस राज में, उसको दौड़ा-दौड़ा कर मारूंगा।"
अधिशासी अधिकारी जितेंद्र मीणा ने पुलिस को बताया कि वह अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के एक सरकारी कर्मचारी हैं। विधायक द्वारा सरेआम फोन पर इस तरह की गंभीर धमकियां दिए जाने के बाद से वे और उनके परिवार के सदस्य गहरे सदमे और दहशत में हैं। विधायक ने उन पर अपने राजकीय कर्तव्यों को न निभाने का नाजायज और अवैधानिक तरीके से भारी दबाव बनाया है।
पुलिस की कार्रवाई: ईओ की इस लिखित रिपोर्ट के आधार पर हिंडोली थाना पुलिस ने विधायक अशोक चांदना के खिलाफ:
राजकीय कार्य में बाधा डालने,
सरकारी कर्मचारी को डराने-धमकाने,
तथा एससी-एसटी एक्ट (SC-ST Act) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
चूंकि मामला एक वर्तमान विधायक से जुड़ा हुआ है, इसलिए हिंडोली पुलिस ने शुरुआती एफआईआर दर्ज कर केस की फाइल अग्रिम जांच के लिए सीआईडी-सीबी मुख्यालय को ट्रांसफर कर दी है। इस घटना के बाद से प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है।
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