टोंक: टोंक जिले में बजरी के अवैध खनन का मामला सामने आया है। जिसमें खनन विभाग, पुलिस, राजस्व विभाग और परिवहन विभाग की मिलीभगत के आरोप लगे हैं। टोडारायसिंह में लीज जारी होने के बावजूद लीज धारक टोंक जिले की सीमा से बनास नदी से अवैध खनन कर रहा है।
क्या है पूरा मामला?
टोडारायसिंह में खनन विभाग ने लीज जारी की है, लेकिन लीज धारक टोंक जिले की सीमा से बनास नदी से बजरी का खनन कर रहा है। इस अवैध खनन में खनन विभाग, पुलिस, राजस्व विभाग और परिवहन विभाग की मिलीभगत सामने आई है। चूली नाके पर सीमा ज्ञान करने पहुंचे तहसीलदार को टोंक और टोडारायसिंह की सीमा की जानकारी नहीं थी। खनन विभाग के एमई और पुलिस भी मौके पर नहीं पहुंचे। परिवहन विभाग लगातार ओवरलोड डंपरों को रोकने में नाकाम रहा है।
सरकारी नियमों और आदेशों की धज्जियां उड़ रही हैं
राज्य सरकार खनन को लेकर सख्त नियम बनाकर नियमों की पालना कराने का दावा करती है, लेकिन टोंक में सरकार के नियमों के साथ ही एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। खनिज विभाग के अधिकारियों से मिली-भगत कर बिना सीमा ज्ञान के ही खुले आम खनन किया जा रहा है।
माफियाओं और अधिकारियों की मिलीभगत
यह मामला टोंक जिले में माफियाओं और अधिकारियों की मिलीभगत का है। टोडारायसिंह तहसील में लीज होने के बाद टोंक क्षेत्र में खुले आम खनन कर नियम कायदों को अधिकारी पलीता लगाते हुए नजर आ रहे हैं। बिना सीमा ज्ञान खनन होने से सरपंच संघ अध्यक्ष मुकेश मीणा ने भारी नाराजगी जताई और कहा कि लीज टोडारायसिंह क्षेत्र में है और खनन टोंक क्षेत्र में किया जा रहा है, यह कहां का न्याय है?
बनास नदी को हो रहा नुकसान
अवैध खनन के कारण बनास नदी को काफी नुकसान हो रहा है। नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी?
इस मामले में अभी तक किसी भी अधिकारी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
आगे की कार्रवाई
इस मामले में प्रशासन को कार्रवाई करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, अवैध खनन को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
यह मामला एक बार फिर से राजस्थान में अवैध खनन की समस्या को उजागर करता है।
मुख्य बिंदु:
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