कोटा। कोटा ग्रामीण इलाके में बिना किसी पंजीकरण और अनुमति के संचालित हो रहे एक अवैध मदरसे पर प्रशासन ने शिकंजा कसा है। बाल कल्याण समिति ने जिला पुलिस और मानव तस्करी विरोधी इकाई के सहयोग से कार्रवाई करते हुए न केवल मदरसे को बंद करवाया, बल्कि वहां अमानवीय स्थितियों में रह रहे 20 बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराया है।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब मदरसे में हो रही मारपीट और प्रताड़ना से तंग आकर एक बच्चा वहां से भाग निकला और कोटा रेलवे स्टेशन पहुंच गया। आरपीएफ ने लावारिस हालत में मिले इस बच्चे को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द किया। बाल कल्याण समिति की पूछताछ में बच्चे ने बताया कि वह पिछले 2 साल से इस मदरसे में रह रहा था और वहां बच्चों के साथ बेरहमी से मारपीट की जाती है।
जांच में सामने आया कि 26 अप्रैल को भी तीन बच्चों ने वहां से भागने की कोशिश की थी। वे ट्रेन पकड़कर बिहार जाना चाहते थे, लेकिन मदरसे के लोगों ने पीछा कर दो बच्चों को रास्ते से ही दोबारा पकड़ लिया। तीसरा बच्चा भागने में सफल रहा, जिसकी सूचना पर अब यह बड़ी कार्रवाई हुई है। समिति अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ के अनुसार, एक हाफिज इन बच्चों को गांव से अच्छी शिक्षा का झांसा देकर यहां लाया था।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि यह आवासीय मदरसा पूरी तरह अपंजीकृत था।
नियमों की अनदेखी: मदरसा संचालन के लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी।
कानूनी उल्लंघन: यहां बच्चों को रखने के तरीके 'किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015' (JJ Act) के प्रावधानों के विपरीत पाए गए।
सुरक्षित आश्रय: रेस्क्यू किए गए सभी 20 बच्चों को फिलहाल सुरक्षित आश्रय गृह भेज दिया गया है।
समिति ने इस मामले में संबंधित थाना पुलिस और मानव तस्करी यूनिट (AHTU) को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। फिलहाल मदरसे की सभी गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है और बच्चों के परिजनों से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है।
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