भरतपुर: राजस्थान में भरतपुर के 292वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित खेल प्रतियोगिता में एक शर्मनाक घटना सामने आई है। लोहागढ़ स्टेडियम में कबड्डी प्रतियोगिता में भाग लेने आई छात्राओं को खेल किट तो दी गई, लेकिन उनके लिए कपड़े बदलने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। मजबूरी में बेटियों को दुपट्टे की ओट में, भीड़ के बीच ही कपड़े बदलने पड़े।
प्रशासन की बड़ी लापरवाही
प्रतियोगिता के दौरान चारों तरफ पुरुषों की मौजूदगी में यह दृश्य न केवल शर्मनाक बल्कि बेहद दुखद था। यह घटना जिला प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है।
- क्या प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ कार्यक्रम आयोजित करने तक सीमित है?
- बेटियों की सुरक्षा और सम्मान की अनदेखी क्यों की गई?
- सरकारी योजनाओं की दुहाई देने वाली सरकार क्या जमीनी स्तर पर इन हालातों से बेखबर है?
कपड़े बदलने की कोई व्यवस्था नहीं
खेल प्रतियोगिता में आईं छात्राओं को टी-शर्ट और नेकर तो दी गईं, लेकिन बदलने के लिए कोई ढका हुआ स्थान नहीं दिया गया।
- मैदान के कोने में दुपट्टे की ओट में कपड़े बदलना उनकी मजबूरी बन गई।
- चारों तरफ पुरुषों और युवाओं की मौजूदगी के बीच उन्हें अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा।
- लेकिन जिला प्रशासन के अधिकारी इससे बेखबर बने रहे।
मुख्यमंत्री के गृह जिले में बेटियों की सुरक्षा पर सवाल
भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला है, लेकिन यहां बेटियों की इज्जत और सुरक्षा की परवाह नहीं की गई।
- जिला कलेक्टर डॉ. अमित यादव ने इस मामले में बेखबरी जताते हुए कहा कि वह इसकी जानकारी लेंगे।
- सवाल यह उठता है कि यदि मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही बेटियां असुरक्षित हैं, तो बाकी प्रदेश में क्या हाल होगा?
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का खोखला नारा?
राज्य सरकार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसी योजनाओं की दुहाई देती है, लेकिन इस घटना ने सरकारी दावों की हकीकत को उजागर कर दिया।
- क्या महिला खिलाड़ियों की इज्जत की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता नहीं है?
- क्या सिर्फ घोषणाओं और योजनाओं से बेटियों का सम्मान सुरक्षित हो सकता है?
यह घटना प्रशासन और सरकार दोनों की असंवेदनशीलता को दर्शाती है। सरकार को इस गंभीर लापरवाही की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और आयोजकों पर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटनाएं न हों।
#BetiBachaoBetiPadhao #RajasthanNews #BharatpurNews #WomenSafety #SportsIndia