भारतीय रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पिछले एक दशक में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। पृथ्वी दिवस 2026 पर जारी आंकड़ों के अनुसार, रेलवे ने न केवल वृक्षारोपण बल्कि ऊर्जा बचत और जल संरक्षण में भी नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
रेलवे ने पिछले एक साल में विभिन्न जोनों में कुल 81,59,000 पौधे लगाए हैं।
अग्रणी जोन: पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (9.3 लाख), दक्षिण मध्य रेलवे (9 लाख) और पूर्वोत्तर रेलवे (8.7 लाख)।
स्वच्छता: 2014 से अब तक ट्रेनों में 3.66 लाख बायो टॉयलेट लगाए जा चुके हैं।
रेलवे अब डीजल से बिजली की ओर पूरी तरह मुड़ चुका है:
विद्युतीकरण: ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.6% हिस्सा विद्युतीकृत हो चुका है। मार्च 2026 तक 69,873 रूट किमी बिजली से जुड़ चुके हैं, जो 2014 में मात्र 21,801 किमी था।
डीजल की बचत: 2016-17 की तुलना में रेलवे ने 178 करोड़ लीटर (62%) डीजल की बचत की है।
नवीकरणीय ऊर्जा: 909 मेगावाट सौर और 103 मेगावाट पवन ऊर्जा चालू है।
पुरस्कार: इन प्रयासों के लिए राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार (NECA) 2025 में रेलवे ने 7 पुरस्कार जीते।
जल संरक्षण के लिए रेलवे ने 'जन भागीदारी' का सहारा लिया है:
रेन वाटर हार्वेस्टिंग: 2016-17 से अब तक 8,313 रूफटॉप संरचनाएं स्थापित की गई हैं। दक्षिण मध्य रेलवे (3,128 यूनिट) इसमें सबसे आगे है।
वॉटर रिसाइकिलिंग: रेलवे अब तक 185 जल पुनर्चक्रण संयंत्र लगा चुका है। उत्तरी रेलवे (27 संयंत्र) इसमें अग्रणी है।
तालाबों का उद्धार: रेलवे की भूमि पर 109 तालाबों और टैंकों का पुनरुद्धार किया गया है।
जल ऑडिट: पानी की बर्बादी रोकने के लिए अब तक 1,944 जल ऑडिट किए गए, जिनमें से 310 ऑडिट अकेले 2025-26 में हुए।
भारतीय रेलवे ने अपने सभी स्टेशनों, कार्यालयों और कॉलोनियों में 100% LED लाइटिंग का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है, जिससे बिजली की खपत में भारी कमी आई है।
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