बूंदी: राजस्थान में पहली बार मुकुंदरा और रामगढ़ टाइगर रिजर्व में अन्य राज्यों से बाघों को लाने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। यह प्रदेश में पहला अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण होगा। हालांकि, टाइगर एक्सपर्ट रघुवीर सिंह शेखावत ने इस पर गंभीर चिंता जताई है।
शेखावत का मानना है कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से आने वाले बाघों को सीधे मुकुंदरा और रामगढ़ में नहीं लाया जाना चाहिए। बल्कि, उन्हें पहले रणथंभौर नेशनल पार्क में रखा जाना चाहिए, ताकि वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल हो सकें।
पिछला अनुभव:
2018 में भारत में पहला अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण किया गया था। मध्य प्रदेश से दो बाघों को ओडिशा के सतकोसिया टाइगर रिजर्व में भेजा गया था। लेकिन यह प्रयोग विफल रहा। इनमें से एक बाघ की मौत हो गई और दूसरे को बेहोश करके वापस मध्य प्रदेश भेजना पड़ा।
मौजूदा योजना:
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से कुल 5 बाघों को राजस्थान के मुकुंदरा और रामगढ़ टाइगर रिजर्व में लाने की योजना है। यह भारत में दूसरा अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण होगा।
टाइगर एक्सपर्ट की चिंता:
रघुवीर सिंह शेखावत का मानना है कि पिछले अनुभव के आधार पर, इस बार भी स्थानांतरण में समस्याएं आ सकती हैं। उन्होंने कहा कि मुकुंदरा और रामगढ़ के वातावरण में बाघों को ढलने में समय लगेगा। यदि उन्हें सीधे यहां लाया जाता है, तो वे बीमार पड़ सकते हैं या मर सकते हैं।
रणथंभौर में रखने का सुझाव:
शेखावत ने सुझाव दिया कि इन बाघों को पहले रणथंभौर नेशनल पार्क में रखा जाए। रणथंभौर में बाघों की आबादी काफी अच्छी है और यहां के वातावरण में ये बाघ आसानी से ढल सकते हैं। कुछ समय बाद, जब ये बाघ पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएं, तब उन्हें मुकुंदरा और रामगढ़ में स्थानांतरित किया जा सकता है।
अन्य राज्य भी शामिल:
यह परियोजना केवल राजस्थान तक ही सीमित नहीं है। देश के अन्य राज्यों जैसे छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और ओडिशा में भी मध्य प्रदेश से बाघों को लाने की योजना है।
निष्कर्ष:
यह परियोजना बाघों की संख्या बढ़ाने और उनके संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, इस परियोजना को सफल बनाने के लिए टाइगर एक्सपर्ट्स के सुझावों पर गौर करना जरूरी है।
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