अजमेर/जयपुर। राजस्थान की सबसे आधुनिक, अभेद्य और सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर सोमवार (29 जून) को एक ऐसी सनसनीखेज वारदात हुई, जिसने सूबे के गृह विभाग और कारागार प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। चंबल का कुख्यात डकैत और लाखों का इनामी बदमाश जगन गुर्जर जेल की बैरक के भीतर बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। इस अप्रत्याशित हत्याकांड ने जहाँ जेल के भीतर गैंगवार और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं जगन गुर्जर की मौत के साथ ही राजस्थान के आपराधिक और राजनीतिक इतिहास का वह सबसे चर्चित पन्ना फिर से खुल गया है, जब उसने पुलिस के बजाय एक राजनेता के सामने घुटने टेके थे।
जगन गुर्जर की हत्या के बाद आज पूरे प्रदेश में वर्ष 2009 के उस 'हाई-प्रोफाइल' आत्मसमर्पण की चर्चा हो रही है, जिसने तत्कालीन समय में देश भर की मीडिया की सुर्खियां बटोरी थीं। कानून और पुलिस के सामने घुटने टेकने के बजाय जगन गुर्जर ने अपनी जान बचाने के लिए एक बेहद सोची-समझी रणनीति के तहत राजनीतिक मंच को चुना था।
एनकाउंटर का खौफ: वर्ष 2009 में राजस्थान पुलिस की स्पेशल टीमों ने चंबल के जंगलों में जगन गुर्जर गिरोह की घेराबंदी कर रखी थी। लगातार हो रहे एनकाउंटर्स से डरे जगन को यकीन था कि अगर वह पुलिस के हत्थे चढ़ा, तो उसका मारा जाना तय है।
चुनावी रैली का फायदा: उस समय 2009 के लोकसभा चुनाव का अभियान चल रहा था। करौली-धौलपुर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करने तत्कालीन युवा सांसद सचिन पायलट हिंडौन सिटी पहुंचे थे। जनसभा मैदान में हजारों की भीड़ थी और भारी पुलिस बल तैनात था।
सुरक्षा घेरा तोड़ा: पुलिस और खुफिया एजेंसियों को चकमा देकर जगन गुर्जर अपने कुछ गुर्गों के साथ साधारण कपड़ों में जनता के बीच बैठ गया। जैसे ही रैली चरम पर पहुँची, जगन अचानक दौड़ता हुआ सुरक्षा घेरे को तोड़कर सीधे मुख्य मंच पर चढ़ गया।
पैरों में डाल दिए हथियार: इससे पहले कि पायलट के सुरक्षाकर्मी या पुलिस कुछ समझ पाती, जगन गुर्जर ने सचिन पायलट के पैरों के पास अपने अत्याधुनिक हथियार डाल दिए और हाथ खड़े कर दिए। उसने चिल्लाकर कहा कि वह सचिन पायलट की साख (क्रेडिबिलिटी) पर भरोसा करते हुए आत्मसमर्पण कर रहा है। सचिन पायलट ने भी बेहद संयम दिखाते हुए पुलिस को उसे कस्टडी में लेने के निर्देश दिए।
इस दुस्साहसिक सरेंडर ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार और राजस्थान पुलिस को भारी सकपकाहट में डाल दिया था।
जगन गुर्जर महज एक साधारण अपराधी नहीं था, बल्कि वह दशकों तक राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमाई इलाकों (त्रिकोणीय चंबल क्षेत्र) और धौलपुर-करौली के डांग क्षेत्र का एक बड़ा आतंक रहा था।
संगीन मुकदमों का शतक: जगन के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, डकैती, रंगदारी और फिरौती के लिए अपहरण जैसे संगीन अपराधों के 100 से अधिक मामले दर्ज थे।
लाखों का इनाम: राजस्थान और एमपी पुलिस ने उस पर लाखों रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। धौलपुर के बाड़ी, बसेड़ी और करौली के जंगलों में सालों तक उसकी तूती बोलती थी।
जेल और जुर्म का सिलसिला: 2009 के सरेंडर के बाद वह कई सालों तक जेल में रहा। बाद में जमानत पर बाहर आते ही उसने फिर से आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देना शुरू कर दिया था। कुछ समय पूर्व ही पुलिस ने उसे दोबारा दबोचकर अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में शिफ्ट किया था।
अजमेर की इस विशेष जेल को राजस्थान की सबसे महफूज जेल माना जाता है, जहाँ केवल खूंखार आतंकियों, कुख्यात गैंगस्टर्स और हार्डकोर अपराधियों को ही कड़ी निगरानी में एकांत (High-tech surveillance) में रखा जाता है।
सोमवार को इसी जेल की एक बैरक के भीतर बंद जगन गुर्जर पर अचानक हुए जानलेवा हमले और उसकी मौत ने जेल प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। घटना के बाद जेल परिसर में हड़कंप मच गया। स्थानीय पुलिस और जेल के आला अधिकारियों ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। जेल के भीतर संभावित गैंगवार को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल (आरएसी) को तैनात कर दिया गया है।
चंबल के जंगलों से शुरू हुआ जगन गुर्जर के जुर्म का सफर, राजनीति के मंच से होता हुआ आखिरकार जेल की सलाखों के पीछे खूनी अंजाम के साथ समाप्त हो गया।
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