जल जीवन मिशन (JJM) घोटाला: सुबोध अग्रवाल के बयानों से ब्यूरोक्रेसी में भूचाल, पूर्व CS सुधांश पंत पर दागे गंभीर सवाल

जल जीवन मिशन (JJM) घोटाला: सुबोध अग्रवाल के बयानों से ब्यूरोक्रेसी में भूचाल, पूर्व CS सुधांश पंत पर दागे गंभीर सवाल

जयपुर | राजस्थान के सबसे बड़े प्रशासनिक घोटालों में से एक 'जल जीवन मिशन' मामले में सोमवार को जयपुर की कोर्ट में उस वक्त सन्नाटा खिंच गया, जब मुख्य आरोपी सुबोध अग्रवाल ने मीडिया के सामने अपनी चुप्पी तोड़ी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की रिमांड अवधि खत्म होने पर कोर्ट में पेशी के दौरान अग्रवाल ने सीधे तौर पर तत्कालीन प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया।

अदालत ने अग्रवाल को 15 अप्रैल तक के लिए दो दिन की और रिमांड पर भेजने के आदेश दिए हैं।

"मेरे कार्यकाल के सिर्फ 4 केस, बाकी 33 सुधांश पंत के समय के"

कोर्ट परिसर के बाहर सुबोध अग्रवाल ने मीडिया से बात करते हुए इस केस की दिशा ही बदल दी। उन्होंने आरोप लगाया कि:

  • कार्यकाल का गणित: फाइनेंस कमेटी के जिन 37 प्रकरणों की जांच हो रही है, उनमें से उनके कार्यकाल के केवल 4 हैं।

  • बाकी 33 मामले: अग्रवाल के अनुसार, शेष 33 प्रकरण सुधांश पंत के कार्यकाल के हैं, जिनमें करीब 600 करोड़ रुपये का मामला जुड़ा है।

  • जांच पर सवाल: अग्रवाल ने आरोप लगाया कि एसीबी उन फाइलों को खंगाल रही है जिनमें भुगतान तक नहीं हुआ, जबकि जहां पैसा देकर गबन हुआ है, वहां जांच की गति धीमी है।

960 करोड़ का कथित घोटाला और 125 सवाल

एसीबी ने सुबोध अग्रवाल को 960 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार के मामले में शिकंजे में लिया है। रिमांड के दौरान एसीबी की विशेष टीम ने उनसे 125 से ज्यादा सवाल पूछे। अग्रवाल का दावा है कि उन्होंने पूरा सहयोग किया है और वे स्वयं इस घोटाले की जांच शुरू करवाने वाले अधिकारी थे।

ब्यूरोक्रेसी में 'आर-पार' की जंग

सुबोध अग्रवाल द्वारा सुधांश पंत का नाम लिए जाने के बाद यह मामला अब केवल भ्रष्टाचार की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। यह राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी के दो शीर्ष अधिकारियों के बीच एक बड़ी जंग में तब्दील होता दिख रहा है।

जांच का बढ़ता दायरा: कई जिलों में कड़ियां

एसीबी केवल जयपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी इस मिशन से जुड़ी अनियमितताओं की जांच कर रही है:

  1. जयपुर: दो अन्य बड़े मामले एसीबी में फिलहाल लंबित हैं।

  2. डूंगरपुर: यहाँ भी जल जीवन मिशन से जुड़ा एक मामला जांचाधीन है।

जैसे-जैसे दस्तावेजों की कड़ियां जुड़ रही हैं, यह आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में राजस्थान के प्रशासनिक इतिहास के कुछ और 'काले पन्ने' खुल सकते हैं।

राजनीतिक हलचल तेज

अग्रवाल के बयानों ने न केवल प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी खलबली मचा दी है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच इस हाई-प्रोफाइल केस को लेकर बयानबाजी तेज होने के आसार हैं। फिलहाल, सबकी नजरें 15 अप्रैल को होने वाली अगली पेशी पर टिकी हैं।


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