सवाईमाधोपुर/ गंगापुर सिटी : देश की सीमाओं पर अपनी जान हथेली पर रखकर तैनात भारतीय सेना के हवलदार जवानों का परिवार सवाईमाधोपुर जिले में इन दिनों भूमाफियाओं के भीषण आतंक से जूझ रहा है। आलम यह है कि देश के रक्षक के सामने यह गंभीर दुविधा खड़ी हो गई है कि वह सीमा पर देश की रक्षा करे या अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करे। पीड़ित परिवार ने स्थानीय प्रशासन पर भूमाफियाओं से मिलीभगत का संगीन आरोप लगाया है, क्योंकि बार-बार लिखित शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
मामले का विवरण: यह मामला सवाईमाधोपुर के चुली हल्का स्थित खसरा संख्या 372 (1.85 हेक्टेयर) की खातेदारी भूमि से जुड़ा है। यह भूमि 70 वर्षीय सितारा की है, जो शिकायतकर्ता शहनाज (हवलदार शकील अहमद की पत्नी) और अफसाना बानो (हवलदार हकीम अहमद की पत्नी) की सास हैं। शिकायतकर्ता अफसाना बानो के बयान (दिनांक 17 मई 2025) के अनुसार, उनके पति हवलदार हकीम अहमद और उनके जेठ हवलदार शकील अहमद भी भारतीय सेना में ही तैनात हैं।
भूमाफियाओं का दुस्साहस: परिवार का आरोप है कि भूमाफिया जैसे पड़ोसी विश्राम बैरवा खसरा संख्या 373 के मालिक और अन्य व्यक्ति मिलकर उनकी पुश्तैनी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने और प्लॉटिंग करने की फिराक में हैं। अफसाना बानो, शहनाज बानो ने अपने बयान में बताया है कि हाल ही में, 17 मई 2025 से 8-10 दिन पहले अभिषेक मीणा, राजू माली, विश्राम बैरवा और गुज्जन सहित कुछ अन्य लोग उनकी जमीन को जबरन नापने के इरादे से आए थे। परिवार के सदस्यों द्वारा रोकने पर उन्होंने धमकियां दीं। गुज्जन मीणा अभिषेक मीणा ने तो यहां तक कहा कि "जब फौजी आएंगे भी, तो भी वे हमें जबरन नाप करने से रोक नहीं पाएंगे और इसमें समय लगेगा।" परिवार को इन लोगों से अपनी जान और जमीन दोनों का खतरा महसूस हो रहा है।
प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल: पीड़ित परिवार ने इस संबंध में जिला कलेक्टर और सवाईमाधोपुर पुलिस अधीक्षक (SP) को 9 मई 2025 को लिखित शिकायत दी थी। पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, अपराध सहायका परिवाद क्रमांक 25/2025 के तहत मामले को महुकला थाने को अग्रिम कार्रवाई हेतु भिजवाया था। शिकायत पत्र में भारतीय दंड संहिता की धारा 175 और 373 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी ताकि भूमाफिया अवैध प्लॉटिंग और कब्जे से बाज आएं।
हालांकि, परिवार का आरोप है कि एसपी कार्यालय से निर्देश मिलने के बावजूद, महुकला थाने से अभी तक कोई भी पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा है। न ही इन भूमाफियाओं को पाबंद किया गया है या उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई है। इसका नतीजा यह है कि भूमाफिया बेखौफ होकर बार-बार उनकी खातेदारी भूमि पर जा रहे हैं और परिवार को धमका रहे हैं।
यह घटना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। आखिर क्यों एक ऐसे सैनिक के परिवार को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, जो देश की सेवा में अपना सब कुछ न्योछावर कर रहा है? क्या प्रशासन की निष्क्रियता भूमाफियाओं के हौसले बुलंद नहीं कर रही है? इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है ताकि देश के जवानों को यह भरोसा रहे कि उनके पीछे उनका परिवार सुरक्षित है और वे निश्चिंत होकर अपनी ड्यूटी निभा सकें।
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