जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों में चल रही न्यायिक कर्मचारियों की हड़ताल को अवैध करार दिया है। हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को शुक्रवार सुबह तक काम पर लौटने का सख्त निर्देश दिया है। इसके साथ ही, सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को भी आदेश दिए गए हैं कि यदि हड़ताली कर्मचारी काम पर नहीं लौटते हैं, तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
जस्टिस अशोक कुमार जैन की अदालत ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब वकीलों को हड़ताल का अधिकार नहीं है, तो वेतनभोगी कर्मचारी कैसे हड़ताल पर जा सकते हैं। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि कर्मचारी काम पर नहीं लौटते हैं, तो अदालतों में वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। इसके तहत जिला न्यायाधीशों और जिला कलेक्टरों को अदालतों में होमगार्ड की नियुक्ति करने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित की गई है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि "अगर अगली तारीख तक भी कर्मचारी काम पर नहीं लौटते हैं, तो रजिस्ट्रार जनरल रेस्मा लागू किया जाए।"
हालांकि, इस सख्त रुख के बावजूद, राजस्थान न्यायिक कर्मचारी संघ ने अपनी मांगों पर अड़े रहने का संकेत दिया है। संघ का कहना है कि "जब तक हमारी मांगे नहीं मानी जाती हैं, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे।" इस स्थिति में, यह देखना होगा कि आगामी दिनों में यह गतिरोध कैसे समाप्त होता है।
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