करौली: राजस्व तंत्र पर उठे सवाल, भीम आर्मी ने संभागीय आयुक्त से की दबंगों के संरक्षण की शिकायत

करौली: राजस्व तंत्र पर उठे सवाल, भीम आर्मी ने संभागीय आयुक्त से की दबंगों के संरक्षण की शिकायत

हिंडौन सिटी | करौली जिले के टोडाभीम उपखंड अंतर्गत तहसील बालघाट में एक गंभीर राजस्व विवाद ने तूल पकड़ लिया है। भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने स्थानीय प्रशासन पर दबंगों को संरक्षण देने और वैधानिक खातेदार को न्याय से वंचित करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में संगठन द्वारा संभागीय आयुक्त भरतपुर को ज्ञापन सौंपकर मामले की स्वतंत्र जांच और अवैध कब्जा हटाने की मांग की गई है।

प्रशासनिक अनियमितता और कानून का उल्लंघन

शिकायत के अनुसार, पीड़ित पक्ष भूमि का वैधानिक खातेदार है, लेकिन प्रशासनिक मिलीभगत के चलते उसे आज तक वास्तविक कब्जे से दूर रखा गया है। मामला संयुक्त खातेदारी की भूमि से जुड़ा है। आरोप है कि राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम के प्रावधानों को ताक पर रखकर, बिना किसी विधिवत विभाजन और सीमांकन के, मौके पर कब्जे संबंधी तथ्य दर्ज किए गए हैं।

विभाजन के नाम पर उलझाया जा रहा मामला

शिकायत में एक महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु उठाया गया है कि जब सभी संयुक्त खातेदार अवैध कब्जा हटाने के पक्ष में सहमत हैं और कोई भी विभाजन नहीं चाहता, तो प्रशासन द्वारा विभाजन की आड़ में बेदखली आदेशों को क्यों रोका जा रहा है? कानूनन, विभाजन न होने की स्थिति में प्रत्येक हिस्सेदार संपूर्ण भूमि का सह-स्वामी होता है। इसके बावजूद, तहसील स्तर पर उन प्रभावशाली व्यक्तियों का पक्ष लिया जा रहा है जिनके पास न तो कोई वैधानिक आदेश है और न ही खातेदारी अधिकार।

न्यायिक अनुशासन के विरुद्ध कार्यवाही का आरोप

भीम आर्मी का आरोप है कि मामला माननीय अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADC), करौली के समक्ष विचाराधीन होने के बावजूद, अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा दिए गए निष्कर्ष न्यायिक अनुशासन के विरुद्ध हैं। धारा 212 एवं 251 राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम के तहत प्रभावी कार्यवाही न करना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है।

भीम आर्मी की प्रमुख मांगें:

  1. प्रकरण की किसी निष्पक्ष एजेंसी से स्वतंत्र जांच कराई जाए।

  2. विवादित भूमि पर तत्काल यथास्थिति (Status Quo) के आदेश जारी हों।

  3. अवैध कब्जाधारियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

  4. पक्षपात करने वाले दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।


मीडिया बाइट

“यह मामला केवल जमीन का विवाद नहीं है, बल्कि यह दलित और पिछड़ों के अधिकारों को दबाने का प्रशासनिक प्रयास है। दबंगों द्वारा अवैध कब्जा और अधिकारियों का पक्षपात स्पष्ट दिखाई दे रहा है। यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो भीम आर्मी न्याय की रक्षा के लिए उग्र आंदोलन करेगी।” — रिंकू कुमार जाटव (संभाग प्रभारी, भीम आर्मी भारत एकता मिशन, भरतपुर)

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