बाल शिविर पर कोरोना का साया: रेलकर्मियों का बदला मन

बाल शिविर पर कोरोना का साया: रेलकर्मियों का बदला मन

कोटा : कोटा से देहरादून और मसूरी जाने वाले रेलवे के बाल शिविर पर कोरोना का साया मंडराने लगा है। देश में लगातार बढ़ रहे कोरोना मामलों के चलते कई रेल कर्मचारियों का मन अब बदलने लगा है और वे अपने बच्चों को शिविर में भेजने को लेकर चिंतित हैं।

कर्मचारियों की चिंताएं: कर्मचारियों का कहना है कि कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए रेलवे भी कोई जोखिम नहीं लेना चाहेगी। यदि कोरोना इसी तरह बढ़ता रहा, तो रेलवे स्वयं इस शिविर को रद्द कर सकती है। यदि ऐसा नहीं होता है, तो कर्मचारी अपने बच्चों को बाल शिविर में भेजने पर पुनर्विचार कर सकते हैं।

एक कर्मचारी ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "अगर बच्चा सही रहेगा, तो अगले साल भी बाल शिविर में जा सकता है। लेकिन कोरोना हो गया, तो बाहर इतने सारे बच्चों को संभालना मुश्किल होगा।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऑन-ड्यूटी कल्याण निरीक्षकों के बच्चे भी नियम विरुद्ध तरीके से इस शिविर में जा रहे हैं। ऐसे में अगर शिविर में कोरोना फैलता है, तो क्या कल्याण निरीक्षक से यह उम्मीद की जा सकती है कि वह अपने बच्चों को छोड़कर दूसरों को संभाले?

इसके अलावा, कर्मचारियों ने शिविर में डॉक्टरी सुविधा की कमी पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कई बार शिविर में कोई डॉक्टर नहीं जाता और पिछली बार भी डॉक्टर की जगह एक फार्मासिस्ट को शिविर में भेज दिया गया था। ऐसे में कोरोना फैलने की स्थिति में रेलवे क्या एक फार्मासिस्ट से बच्चों का इलाज करवाएगी?

गौरतलब है कि इस शिविर में करीब 34 बच्चे जा रहे हैं और लगभग एक दर्जन कर्मचारियों का स्टाफ है। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के बीच कोरोना नियमों का पालन कराना एक कठिन काम साबित हो सकता है।

देशभर में बढ़ रहे कोरोना के मामले: देशभर में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। शनिवार तक ही 300 से अधिक नए कोरोना मरीज सामने आ चुके थे। इनमें से सात मरीज राजस्थान के भी थे, और इन सात में से तीन बच्चे भी कोरोना संक्रमित पाए गए थे। कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों के चलते सरकार ने लोगों से बिना घबराए पहले की तरह विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। साथ ही, अस्पतालों को भी ऑक्सीजन और जरूरी दवाइयों आदि का स्टॉक रखने के आदेश दिए गए हैं।

यह स्थिति बाल शिविर की सुरक्षा और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है, जिस पर रेलवे प्रशासन को तुरंत ध्यान देना चाहिए।

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