कोटा मंडल ने रचा इतिहास: 180 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ी 'वंदे भारत स्लीपर', ट्रायल सफल
कोटा, राजस्थान
भारतीय रेल ने स्वदेशी तकनीक और रफ्तार के क्षेत्र में आज एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा-नागदा रेलखंड पर भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का हाई-स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस दौरान ट्रेन ने 180 किमी/घंटा की अधिकतम गति को छुआ, जो यात्रियों के लिए भविष्य में कम समय में लंबी दूरी तय करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
मुख्य संरक्षा आयुक्त की देखरेख में परीक्षण
यह महत्वपूर्ण परीक्षण मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त (CCRS) और कोटा के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) की प्रत्यक्ष उपस्थिति में किया गया। इस ट्रायल का मुख्य उद्देश्य उच्च गति पर ट्रेन की स्थिरता, ब्रेकिंग सिस्टम और सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच करना था। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन ने सभी तकनीकी पैमानों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
क्या है खास इस वंदे भारत स्लीपर में?
वंदे भारत का स्लीपर संस्करण लंबी दूरी की यात्रा के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
* स्वदेशी तकनीक: इसे पूरी तरह से 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत तैयार किया गया है।
* बेहतर स्थिरता: 180 किमी/घंटा की रफ्तार पर भी यात्रियों को झटके महसूस न हों, इसके लिए उन्नत सस्पेंशन सिस्टम का उपयोग किया गया है।
* आधुनिक सुविधाएं: ट्रेन में कवच (Kavach) सुरक्षा प्रणाली, सेंसर आधारित इंटरनल डोर और वर्ल्ड क्लास इंटीरियर दिया गया है।
* समय की बचत: तेज गति और त्वरित त्वरण (Acceleration) के कारण यह राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों से भी कम समय लेगी।
पश्चिम मध्य रेलवे के लिए बड़ी उपलब्धि
कोटा-नागदा सेक्शन अपनी सीधी पटरियों और अनुकूल भौगोलिक स्थिति के कारण हमेशा से हाई-स्पीड ट्रायल्स के लिए जाना जाता रहा है। इस सफल परीक्षण के बाद अब जल्द ही इस ट्रेन को यात्री सेवा के लिए शुरू किए जाने की संभावना है।
रेल मंत्रालय ने इस सफलता पर कोटा मंडल और पश्चिम मध्य रेलवे की टीम को बधाई दी है। यह ट्रायल न केवल भारतीय इंजीनियरिंग की कुशलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि भारतीय रेल अब वैश्विक मानकों को टक्कर देने के लिए तैयार है।
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