कोटा | पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) में इन दिनों एक नया फरमान रेल कर्मचारियों के बीच चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है। पश्चिम मध्य रेलवे मजदूर संघ ने चंदा वसूली का एक ऐसा नया फॉर्मेट तैयार किया है, जिससे कर्मचारियों की अनुमति के बिना ही उनके वेतन से हर साल एक हजार रुपये की कटौती कर ली जाएगी। संघ के इस फैसले से न केवल सामान्य कर्मचारी हैरान हैं, बल्कि अन्य कर्मचारी संगठनों ने भी इसे 'सीधी लूट' करार देते हुए मोर्चा खोल दिया है।
अभी तक के नियमों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी संगठन को चंदा काटने के लिए हर साल कर्मचारी से लिखित अनुमति लेनी पड़ती थी। लेकिन मजदूर संघ के नए फॉर्मेट ने इस बाध्यता को खत्म कर दिया है:
एक बार अनुमति, जीवनभर कटौती: यदि किसी कर्मचारी ने एक बार चंदा कटने की सहमति दे दी, तो हर साल जनवरी और बोनस के समय उसके वेतन से 1,000 रुपये अपने आप कट जाएंगे।
इच्छा हो या न हो, पैसा कटेगा: कर्मचारी की इच्छा के बिना भी यह कटौती तब तक जारी रहेगी, जब तक वह खुद लिखित में इसे बंद करने का आवेदन नहीं देता।
पदाधिकारी की मर्जी अनिवार्य: सबसे चौंकाने वाली शर्त यह है कि कटौती बंद करने के लिए भी संगठन के पदाधिकारी की सहमति जरूरी होगी। यदि पदाधिकारी अनुमति नहीं देता, तो कर्मचारी के खाते से पैसा कटता ही रहेगा।
मजदूर संघ के इस निर्णय के बाद रेलवे के अन्य संगठनों में भारी आक्रोश है। विरोधी संगठनों का कहना है कि यह कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उनका तर्क है कि यदि कोई कर्मचारी अपना संगठन बदल भी लेता है, तब भी यह 'ऑटो-डेबिट' सिस्टम उसकी जेब ढीली करता रहेगा। इसे कर्मचारियों को आर्थिक रूप से बंधक बनाने की योजना बताया जा रहा है।
विपक्षी संगठनों ने रेल प्रशासन को दो-टूक चेतावनी दी है कि यदि इस तानाशाही फॉर्मेट को लागू करने की अनुमति दी गई, तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल, कोटा मंडल सहित पूरे पश्चिम मध्य रेलवे में इस नए फॉर्मेट को लेकर कर्मचारियों के बीच तीखी बहस छिड़ी हुई है।
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