कोटा। कोटा रेल मंडल के 74वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित जश्न का स्वाद उस समय फीका पड़ गया, जब अव्यवस्थाओं और भेदभाव के चलते कई अधिकारियों को बिना खाना खाए ही वापस लौटना पड़ा। आयोजन में प्रदर्शनी और कवि सम्मेलन के साथ डिनर की व्यवस्था भी थी, लेकिन कुप्रबंधन के कारण उत्सव का माहौल नाराजगी में बदल गया।
समारोह के बाद डिनर का जिम्मा हिंदी राजभाषा विभाग के पास था, जिसके वर्तमान प्रभारी वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक विनोद मीणा हैं। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि डिनर के निमंत्रण पत्र बांटने में भारी भेदभाव किया गया:
चुनिंदा न्योता: वरिष्ठ अधिकारियों को 'सपरिवार' आमंत्रित किया गया, जबकि अन्य अधिकारियों को केवल 'सिंगल' कार्ड भेजे गए।
कार्ड की कमी: कई अधिकारियों को तो सिंगल कार्ड तक नसीब नहीं हुआ। इस उपेक्षा से आहत होकर कई रेल अधिकारी ऑफिसर क्लब से बिना भोजन किए ही चले गए।
अव्यवस्था का आलम केवल डिनर तक सीमित नहीं रहा। कार्यक्रम के दौरान परोसे गए नाश्ते (जलेबी और पकौड़ी) में भी लापरवाही दिखी:
स्टेज पर प्रस्तुति दे रहे कलाकारों तक लंबे समय तक नाश्ता नहीं पहुँचाया गया।
थक-हारकर कलाकारों को मंच से ही नाश्ते की मांग करनी पड़ी, जिसके बाद आनन-फानन में उन्हें अल्पाहार दिया गया।
कार्यक्रम में मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि नाश्ता परोसने में भी 'पदानुक्रम' (Hierarchy) का पूरा ध्यान रखा गया:
वीआईपी ट्रीटमेंट: आगे की पंक्तियों में बैठे बड़े अधिकारियों को नाश्ते के साथ टिश्यू पेपर भी दिया गया।
कर्मचारियों की अनदेखी: पीछे बैठे कर्मचारियों को टिश्यू पेपर नहीं दिए गए, जिसके चलते नाश्ते के बाद वे हाथ पोंछने के लिए इधर-उधर परेशान होते नजर आए।
चर्चा का विषय: नाश्ते की प्लेट में गिनी-चुनी दो जलेबी और तीन-चार पकौड़ियां और उसके साथ हुआ यह भेदभाव अब रेल गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अधिकारी और कर्मचारी इस आयोजन की सादगी कम और "कंजूसी" ज्यादा बता रहे हैं।
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