कोटा। कोटा रेल मंडल में सुरक्षा और कर्मचारियों के जीवन से खिलवाड़ का एक बड़ा मामला सामने आया है। मंडल में अभी भी दर्जनों ऐसे रेलवे क्रॉसिंग गेट हैं, जहाँ रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इन फाटकों पर गेटमैन रात के घने अंधेरे में काम करने को मजबूर हैं, जिससे उनकी जान को लगातार खतरा बना हुआ है। अंधेरे में जहरीले जीव-जंतुओं (साँप, बिच्छू आदि) का खतरा और भी बढ़ जाता है, खासकर इन दिनों जब मानसून की बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
कर्मचारियों द्वारा प्रशासन से इस कमी को दूर करने की कई बार मांग की जा चुकी है, लेकिन अभी भी व्यवस्था में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं आया है।
कर्मचारियों ने बताया कि कई क्रॉसिंग गेटों पर सोलर लाइट लगाई गई हैं, लेकिन ये सोलर लाइटें भी पूरी रात नहीं जलतीं। इन दिनों बारिश के कारण सूरज न निकलने से ये लाइटें रात में बिल्कुल भी नहीं जल रही हैं।
इसका एक उदाहरण गुडला स्टेशन के पास स्थित गेट नंबर 112 है, जहाँ सोलर लाइट मात्र 2 घंटे ही जलती है। बारिश के मौसम में तो यह 2 घंटे भी नहीं जल पाती। जंगली इलाका होने के कारण यहाँ कई बार गेट और पैनल पर सांप आ जाते हैं। पिछले दिनों भी एक गेट पर सांप आ गया था, गनीमत रही कि गेटमैन की नज़र उस पर पड़ गई और उसे मार दिया गया, अन्यथा एक बड़ा हादसा हो सकता था।
इसी तरह, बारां रेलखंड स्थित कल्याणपुर और भौंरा स्टेशनों के बीच गेट नंबर 13 पर 24 घंटे में से मात्र 5 घंटे ही बिजली आती है। यह बिजली भी एग्रीकल्चर फीडर से सप्लाई हो रही है, जिससे पर्याप्त रोशनी नहीं मिल पाती। पर्याप्त बिजली के अभाव में यहाँ रात में बड़ी परेशानी होती है।
इसी तरह, मखोली स्टेशन के पास गेट नंबर 161 पर भी 24 में से केवल 5-6 घंटे ही लाइट आती है। इन फाटकों पर कर्मचारी लगातार 12-12 घंटे अंधेरे में ड्यूटी करते हैं, जबकि फाटक के 500 मीटर के दायरे में एक भी रेलवे आवास नहीं है, जिससे उन्हें और भी अधिक असुरक्षित महसूस होता है।
कर्मचारियों ने एक बार फिर रेलवे प्रशासन से इन फाटकों पर पर्याप्त और स्थायी रोशनी की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि उनकी जान को जोखिम में डालकर ड्यूटी न करनी पड़े।
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