कोटा रेल मंडल में इन दिनों चल रहा टिकट चेकिंग अभियान विवादों के घेरे में है। आरोप लग रहे हैं कि चेकिंग स्टाफ अपना टारगेट पूरा करने के चक्कर में उन यात्रियों के भी चालान काट रहा है जिनके पास वैध टिकट या पास मौजूद हैं। ताजा मामला 'रेल वन ऐप' (Rail One App) और खराब नेटवर्क कनेक्टिविटी से जुड़ा है।
भवानीमंडी के रहने वाले सिविल इंजीनियर भरत कुमार के साथ सोमवार को हुई घटना ने ऑनलाइन टिकटिंग की खामियों को उजागर कर दिया है। भरत रोज़ाना रामगंजमंडी से भवानीमंडी के बीच सफर करते हैं और उनके पास ऑनलाइन मंथली पास (MST) भी है।
विवाद की वजह: कोटा-नागदा ट्रेन में चेकिंग के दौरान नेटवर्क की समस्या के कारण उनका ऐप नहीं खुला।
टीटीई की बेरुखी: यात्री ने भवानीमंडी स्टेशन आने तक का इंतज़ार करने की गुजारिश की ताकि नेट चलने पर पास दिखाया जा सके, लेकिन टीटीई ने एक न सुनी।
जबरन वसूली: बिना टिकट मानकर यात्री से ₹280 का जुर्माना वसूल लिया गया।
हैरानी की बात यह रही कि जैसे ही ट्रेन भवानीमंडी पहुँची और इंटरनेट चलने लगा, भरत ने अपना वैध मंथली पास टीटीई को दिखाया। इसके बावजूद टीटीई ने यह कहते हुए पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया कि "अब कुछ नहीं हो सकता।" पीड़ित यात्री का सवाल वाजिब है कि यदि डिजिटल टिकट दिखाने के लिए स्टेशन आने तक का समय भी नहीं दिया जाएगा, तो ऐसी ऑनलाइन सुविधाओं का क्या फायदा?
कोटा रेल मंडल द्वारा चलाए गए इस विशेष अभियान में कल कुल 147 मामले पकड़े गए। विभाग ने यात्रियों से कुल ₹43,920 की जुर्माना राशि वसूली। जहाँ एक ओर रेलवे इसे अपनी उपलब्धि बता रहा है, वहीं यात्रियों में अनुचित कार्रवाई को लेकर गहरा रोष है।
यात्री सलाह: यदि आप ऑनलाइन टिकट या ऐप आधारित पास लेकर यात्रा कर रहे हैं, तो उसका स्क्रीनशॉट (Offline Copy) या प्रिंटआउट साथ रखें ताकि नेटवर्क न होने की स्थिति में आप जुर्माने से बच सकें।
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