कोटा रेल मंडल: बीता साल - कहीं खुशी, कहीं गम

कोटा रेल मंडल: बीता साल - कहीं खुशी, कहीं गम

Rail News: कोटा रेल मंडल के लिए बीता साल घटनाओं, विवादों और उपलब्धियों का मिला-जुला समय रहा। इस दौरान कई दुर्घटनाएं सामने आईं, वहीं प्रशासनिक और संगठनात्मक मुद्दे भी चर्चा का विषय बने।

रेलवे एम्पलाइज यूनियन की हार बनी चर्चा का विषय

साल का सबसे चर्चित मामला रेलवे एम्पलाइज यूनियन के चुनाव से जुड़ा रहा। 11 साल बाद तीन महीने लंबी प्रक्रिया के बाद हुए इस चुनाव में मजदूर संघ की जीत से अधिक चर्चा यूनियन की हार और इसके बाद जारी आदेशों की रही।

दुर्घटनाओं और साजिशों ने बढ़ाई चिंता

कोटा मंडल में कई रेल दुर्घटनाएं सामने आईं। 4 जनवरी को जोधपुर-भोपाल ट्रेन का पटरी से उतरना, बारां के पास ट्रेन पलटने की साजिश के तहत पटरी पर बाइक का फ्रेम रखना और बूंदी के पास ट्रेन के नीचे लोहा रखने जैसे मामले सामने आए। हालांकि, रेलवे की तत्परता से बड़ी दुर्घटनाएं टल गईं।

डीआरएम और अधिकारियों पर दर्ज मामले

कोटा मंडल में डीआरएम मनीष तिवारी के खिलाफ रेलवे की जमीन विवाद में मामला दर्ज हुआ, जो चर्चाओं में रहा। एलम पाउडर घोटाले में सीबीआई द्वारा मंडल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी बड़ी खबर बनी।

सुरक्षा और चोरी के मामले

मंडल में चोरी और लूटपाट के मामलों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। लाखेरी रेलखंड में रेलवे संपत्ति की चोरी और कोटा-इटावा ट्रेन पर लूटपाट में आरपीएफ जवान घायल होने जैसी घटनाएं सामने आईं।

नई ट्रेनें और विकास कार्य

बीते साल कोटा-चौमहला और कोटा-सवाई माधोपुर नई मेमू ट्रेन का संचालन शुरू हुआ। इसके अलावा, उदयपुर-आगरा वंदे भारत ट्रेन और इसके जनरल कोच का ट्रायल भी किया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार

रेलवे अस्पताल में पहली बार इंटरर्नशिप शुरू की गई। अस्पताल को एक पारी में चलाने का निर्णय लिया गया, और दिल्ली के निजी अस्पतालों से जुड़ाव के बाद कर्मचारियों को बेहतर इलाज की सुविधा प्रदान की गई।

टीटीई विवाद और यात्रियों की शिकायतें

टीटीई और यात्रियों के बीच विवाद, अवैध वसूली, और विजिलेंस कार्रवाई के मामले भी सामने आए। पार्किंग में अवैध वसूली और ओवरचार्जिंग की शिकायतें लगातार बनी रहीं।

सांसदों की नाराजगी और विभागीय समस्याएं

कोटा में हुई सांसदों की बैठक में कम उपस्थिति और सर्वे की देरी पर सांसद सुधीर गुप्ता की नाराजगी चर्चा का विषय बनी। इसके अलावा, विभागीय परीक्षा में गड़बड़ी और विजिलेंस कार्रवाई ने भी सुर्खियां बटोरीं।

कर्मचारियों की मौतें

ड्यूटी के दौरान कई कर्मचारियों की मौतें हुईं। इनमें सवाई माधोपुर में ओएचई की चपेट में आए कर्मचारी, लाखेरी में ट्रेन से कटने वाला कर्मचारी और वर्कशॉप में ऊंचाई से गिरे कर्मचारी की घटनाएं शामिल हैं।

नए साल की ओर उम्मीदें

कोटा मंडल ने 11 शील्ड्स पर कब्जा जमाकर अपनी क्षमता साबित की। अब नए साल में मंडल से तेज ट्रेनों के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था में सुधार, और यात्री सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद की जा रही है।

कोटा रेल मंडल के लिए बीता साल अनुभवों और सबक का समय रहा। मंडल ने कई उपलब्धियां हासिल कीं, लेकिन चुनौतियां भी सामने रहीं। अब सभी की निगाहें आने वाले साल में प्रगति और सुधार पर टिकी हैं।

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