कोटा। कोटा रेल मंडल प्रशासन ने एक सख्त कदम उठाते हुए उन एक दर्जन स्लीपर और एसी क्लास के टीटीई (कंडक्टरों) को ट्रेन ड्यूटी से हटाकर स्टेशन पर तैनात कर दिया है, जो रेलवे को निर्धारित राजस्व अर्जित करने में विफल रहे थे। ये आदेश मंगलवार को जारी किए गए।
उल्लेखनीय है कि कोच चेक करने के अतिरिक्त, स्लीपर और एसी क्लास के कंडक्टरों को रोजाना कम से कम 3,000 रुपये का जुर्माना अनुचित और बिना टिकट यात्रियों से वसूलना अनिवार्य होता है। वहीं, टिकट चेकिंग स्टाफ को प्रतिदिन 15,000 रुपये की कमाई करना आवश्यक है। जो टीटीई यह लक्ष्य पूरा नहीं कर पाते, उन्हें ट्रेन से हटाकर स्टेशन पर लगा दिया जाता है। इस पर वाणिज्य अधिकारी प्रत्येक टीटीई की दैनिक कमाई पर बारीकी से नजर रखते हैं।
इसके अलावा, स्टेशन पर तैनात टीटीई को भी रोजाना 2,000 रुपये का जुर्माना वसूलना अनिवार्य होता है। ऐसा न करने वाले टीटीई को विभिन्न तरीकों से दंडित किया जाता है।
वर्तमान में कोटा मंडल में करीब 218 टीटीई कार्यरत हैं। इनमें से 170 की ड्यूटी एसी और स्लीपर क्लास में, 33 की चेकिंग में और 15 टीटीई की ड्यूटी स्टेशन पर है।
टीटीई की कमाई साल भर एक जैसी नहीं रहती, यह यात्रियों की संख्या के आधार पर घटती-बढ़ती रहती है। इन दिनों यात्री भार अपेक्षाकृत कम होने से टीटीई की कमाई में भी कमी आई है। विशेष रूप से श्राद्ध पक्ष में यात्रियों की संख्या सबसे कम रहती है, जिससे इस महीने टीटीई की कमाई भी सबसे कम होती है। हालाँकि, रेलवे भी सीज़न के हिसाब से कई बार महीने के लक्ष्य को घटा या बढ़ा देता है, लेकिन इसके बावजूद कम कमाई का खामियाजा टीटीई को भुगतना पड़ता है।
इसके अतिरिक्त, रेलवे द्वारा चलाए जा रहे लगातार विशेष टिकट चेकिंग अभियानों का भी कमाई पर असर पड़ा है। इन अभियानों के चलते अब अधिक यात्री टिकट लेकर यात्रा कर रहे हैं, और अनुचित टिकट लेकर स्लीपर क्लास में यात्रा करने वाले यात्रियों पर भी रेलवे ने सख्ती बरती है। इन सभी कारकों का टीटीई की मौजूदा कमाई पर प्रभाव पड़ा है।
भरतपुर में करीब एक दर्जन टीटीई तैनात हैं, जिनमें से कई स्लीपर क्लास में ड्यूटी के लिए अधिकृत हैं। हालाँकि, प्रशासन द्वारा उनसे चेकिंग का काम लिया जा रहा है। इसके अलावा, स्लीपर क्लास के अन्य कई टीटीई को भी चेकिंग में लगाया गया है। इसके चलते कुल कैडर का 11 प्रतिशत स्टाफ चेकिंग में लगा हुआ है, जबकि रेलवे बोर्ड के नियमानुसार कुल कैडर के 7 प्रतिशत से अधिक स्टाफ को चेकिंग में नहीं लगाया जा सकता है।
चेकिंग में अधिक स्टाफ लगाने का असर स्लीपर और एसी कोचों में स्पष्ट दिख रहा है, जहाँ कई ट्रेनें बिना टीटीई के ही जा रही हैं।
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