कोटा। लाखेरी में नए वाहन पार्किंग स्टैंड का निर्माण जारी है, जिसमें सीमेंट-कंक्रीट का पक्का फर्श भी बनवाया जा रहा है। लेकिन इस काम में ठेकेदार द्वारा चंबल नदी की काली रेत का उपयोग किया जा रहा है।
रेलवे के मानकों के अनुसार, इस तरह के निर्माण में बनास नदी की रेत का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। काली रेत में मिट्टी की मात्रा अधिक होने के कारण रेलवे ने इसके उपयोग पर रोक लगा रखी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, निर्माण कार्य के समय रेलवे का कर्मचारी मौजूद रहता है। बावजूद इसके काली रेत का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे नियमों की धज्जियां उड़ी हैं।
लाखेरी में काली रेत का यह पहला मामला नहीं है। पहले भी रेलवे स्टेशन पर किए गए कार्यों में बड़ी मात्रा में काली रेत का इस्तेमाल हुआ था। कई समाचार और शिकायतों के बावजूद कोटा मंडल रेल प्रशासन ने किसी जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इसी कारण रेलवे में काली रेत का इस्तेमाल खुलेआम और बिना रोक-टोक जारी है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठते हैं।
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