कोटा | कोटा मंडल के वरिष्ठ खंड अभियंता (Senior Section Engineer) पीयूष शर्मा को उनकी अदम्य साहस और त्वरित निर्णय क्षमता के लिए भारतीय रेलवे के सर्वोच्च सम्मानों में से एक 'अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार' के लिए चुना गया है। शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव उन्हें इस राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजेंगे।
घटना पिछले साल 3 सितंबर की है। सुबह करीब 4:00 बजे दरा घाटी (कंवलपुरा–दरा) के बीच मूसलाधार बारिश हो रही थी। इसी दौरान पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा खिसककर सीधे रेल पटरी पर आ गिरा। गश्त कर रहे ट्रैकमैनों ने इसकी सूचना तुरंत पीयूष शर्मा को दी।
पीयूष ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए तुरंत जानकारी जुटाई तो पता चला कि पिछले स्टेशन से एक सवारी गाड़ी (Passenger Train) रवाना हो चुकी है। अगर ट्रेन मलबे से टकराती, तो सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती थी।
समय बहुत कम था और ट्रेन तेजी से मलबे की ओर बढ़ रही थी। पीयूष ने बिना एक पल गंवाए इलेक्ट्रिक लाइन (OHE) की बिजली सप्लाई बंद करवा दी। बिजली कटते ही ट्रेन रास्ते में ही रुक गई और एक भयानक रेल दुर्घटना टल गई। इस सूझबूझ भरी कार्यवाही के कारण करीब 5 घंटे रेल यातायात प्रभावित रहा और 20 ट्रेनें देरी से चलीं, लेकिन सैकड़ों यात्रियों की जान सुरक्षित रही।
भारतीय रेलवे के 17 जोनों और उत्पादन इकाइयों में से इस साल मात्र 100 रेलकर्मियों को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया है। गौरव की बात यह है कि पूरे पश्चिम-मध्य रेलवे (WCR) से पीयूष शर्मा एकमात्र कर्मचारी हैं जिन्हें यह सर्वोच्च सम्मान मिल रहा है।
"असाधारण सतर्कता, विषम परिस्थितियों में सटीक निर्णय और अद्भुत नेतृत्व क्षमता के कारण पीयूष शर्मा को इस राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया है।"
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