कोटा। कोटा और मथुरा के बीच श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 15 अगस्त से कृष्ण जन्माष्टमी स्पेशल ट्रेन का संचालन शुरू किया जा सकता है। कोटा मंडल द्वारा इस संबंध में जबलपुर मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है और बुधवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है। यह विशेष ट्रेन दोनों ओर से तीन-तीन दिन चलेगी।
प्रस्तावित समय सारिणी के अनुसार, यह ट्रेन कोटा से सुबह 8:45 बजे रवाना होकर दोपहर 2:10 बजे मथुरा पहुंचेगी। वापसी में मथुरा से शाम 4:15 बजे रवाना होकर रात 9:10 बजे कोटा पहुंचेगी। रास्ते में यह ट्रेन इंद्रगढ़, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, श्री महावीर जी, हिंडौन, बयाना तथा भरतपुर स्टेशनों पर भी रुकेगी। उल्लेखनीय है कि जन्माष्टमी के अवसर पर हाड़ौती सहित देश भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मथुरा जाते हैं।
एक तरफ जहां जन्माष्टमी स्पेशल ट्रेन की खबर राहत दे रही है, वहीं ट्रेनों में अभी भी राखी के त्यौहार की भीड़ कम नहीं हुई है। वर्तमान में सभी ट्रेनें पूरी तरह भरी हुई चल रही हैं, और पैसेंजर ट्रेनों में भी बड़ी संख्या में यात्री सफर कर रहे हैं। हालांकि, मेमू (MEMU) ट्रेनों में यात्रियों के अनुपात में डिब्बों की संख्या कम होने के कारण कोटा मंडल में मुसाफिरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अत्यधिक भीड़ के चलते कई यात्री ट्रेनों में सवार नहीं हो पा रहे हैं और उन्हें प्लेटफॉर्म पर ही रुकना पड़ रहा है। यात्री सुविधाओं का ढिंढोरा पीटने वाले किसी भी अधिकारी को मुसाफिरों की इस परेशानी को समझने के लिए आगे आता नहीं देखा जा रहा है।
मंगलवार को कोटा-बीना मेमू ट्रेन में भी बारां स्टेशन पर यात्रियों की जबरदस्त भीड़ देखी गई। ट्रेन में चढ़ने तक की जगह न होने के कारण कई यात्रियों की मेमू ट्रेन छूट गई।
यात्रियों की इस गंभीर परेशानी को देखते हुए, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और रेलवे प्रशासन द्वारा करीब 3 महीने पहले कोटा मंडल को एक नई मेमू ट्रेन मिलने की घोषणा की गई थी। हालांकि, त्योहारों का सीजन शुरू होने के बावजूद कोटा मंडल को यह मेमू ट्रेन अभी तक नहीं मिली है, जबकि इस दौरान फैक्ट्री से कई मेमू रैक निकल चुके हैं।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यदि भविष्य में कोटा मंडल को मेमू का एक नया रैक मिलता है, तो उसे या तो अन्य ट्रेनों में डिब्बे जोड़कर इस्तेमाल किया जा सकता है या एक नई मेमू ट्रेन चलाई जा सकती है। इससे यात्रियों की परेशानी काफी हद तक कम होगी। हालांकि, रखरखाव की सुविधा नहीं होने के कारण यह रैक सीधा कोटा को न मिलकर बीना को मिलेगा, जिसके बाद कोटा मंडल को उसका उपयोग करने की व्यवस्था की जाएगी।
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