मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँचा भूमि विवाद, प्रशासनिक आदेशों में उलझा मालीयों की चौकी का मामला

मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँचा भूमि विवाद, प्रशासनिक आदेशों में उलझा मालीयों की चौकी का मामला

सवाई माधोपुर | ग्राम मालीयों की चौकी (तहसील तलावड़ा) में एक खातेदारी भूमि पर निर्माण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक जटिल कानूनी और प्रशासनिक मुद्दा बन गया है। यह मामला न केवल जिला प्रशासन बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के हस्तक्षेप तक पहुँच चुका है, जिससे क्षेत्र में चर्चाएँ गर्म हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय की सक्रियता और राजस्व जांच

मामले की शुरुआत श्रीमती ममता सैनी द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय में दर्ज कराई गई शिकायत (रजिस्टर संख्या 01/2026) से हुई। शिकायत में खसरा संख्या 1211/885 पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया गया था। जिला कलेक्टर के निर्देश पर जब राजस्व टीम ने जांच की, तो तथ्यों में नया मोड़ आया।

पटवारी हल्का अमरगढ़ की जांच के मुख्य बिंदु:

  • विवादित भूमि खसरा संख्या 884 (रकबा 0.07 हेक्टेयर) राजस्व रिकॉर्ड में प्रहलाद, मुकेश, मोतीलाल और हीरालाल के नाम संयुक्त खातेदारी में दर्ज है।

  • रिपोर्ट में कहा गया कि कृषि भूमि पर बिना अनुमति के निर्माण कार्य किया जा रहा था, जिसे मौके पर पहुँचकर रुकवा दिया गया।

न्यायालय का हस्तक्षेप: 2022 के फैसले की पालना का निर्देश

इस मामले में नया मोड़ तब आया जब अतिरिक्त जिला कलेक्टर न्यायालय ने 9 जनवरी 2026 को एक आदेश जारी किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि:

  1. इस भूमि को लेकर उप जिला कलेक्टर (SDM) गंगापुर सिटी द्वारा 10 नवंबर 2022 को पहले ही एक निर्णय (प्रहलाद बनाम गुलाब) पारित किया जा चुका है।

  2. यदि वर्तमान में कोई स्थगन आदेश (Stay Order) प्रभावी नहीं है, तो पुराने निर्णय की तत्काल पालना की जाए।

  3. न्यायालय ने आदेश की पालना में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न करने की सख्त हिदायत दी है।

खातेदारों का पक्ष: "प्रशासन ने गलत तरीके से रोका कार्य"

प्रार्थी खातेदारों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि:

  • वे अपनी ही भूमि पर बाउंड्रीवाल और कृषि गोदाम का निर्माण कर रहे थे।

  • 23 दिसंबर 2025 को पटवारी और गिरदावर की मौजूदगी में बाकायदा पत्थर गढ़ी की गई थी।

  • उनका आरोप है कि तहसीलदार तलावड़ा ने न्यायालय के पुराने आदेशों की अनदेखी कर निर्माण कार्य रुकवाया है।

निष्कर्ष: उलझती जा रही गुत्थी

वर्तमान में स्थिति यह है कि एक तरफ मुख्यमंत्री कार्यालय की शिकायत पर हुई जांच है, तो दूसरी तरफ न्यायालय का पुराना आदेश। प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि वह राजस्व नियमों और अदालती आदेशों के बीच सामंजस्य कैसे बिठाता है। ग्रामीणों की निगाहें अब जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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