कोटा : कोटा रेल मंडल में लोको पायलट सत्य प्रकाश को सात दिन में नौ चार्जशीट थमाने के मामले में तीसरे दिन शुक्रवार को भी पूछताछ जारी रही। इस हाई-प्रोफाइल मामले में दिल्ली एसटी-एससी आयोग ने भी संज्ञान लिया है और जांच का जिम्मा कोटा रेल मंडल के कार्मिक विभाग को सौंप दिया है।
पूछताछ और बयान दर्ज: जांच टीम ने शुक्रवार को लोको पायलट सत्य प्रकाश, लॉबी सुपरवाइजर केपी सिंह और लोको निरीक्षक तेजपाल मीणा के बयान दर्ज किए। हालांकि, सत्य प्रकाश के गुरुवार को अचानक रेलवे अस्पताल में भर्ती होने के कारण उनके बयानों पर हस्ताक्षर नहीं हो पाए। फिलहाल इन बयानों का खुलासा नहीं किया गया है। जांच टीम अपनी रिपोर्ट अब मुख्यालय के अधिकारियों को सौंपेगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
कोटा को सौंपी गई जांच: दिल्ली एसटी-एससी आयोग ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच का काम कोटा रेल मंडल के कार्मिक विभाग को सौंपा है। कार्मिक विभाग ने जांच के लिए दो कल्याण निरीक्षकों को नियुक्त किया है। ये निरीक्षक भी लोको पायलट, लॉबी सुपरवाइजर और लोको निरीक्षक के बयान लेंगे।
क्या है पूरा मामला? यह मामला लोको पायलट सत्य प्रकाश द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि अधिकारियों ने उन्हें सात महीने में नौ चार्जशीट थमाई हैं। सत्य प्रकाश ने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, रेलवे बोर्ड, पश्चिम-मध्य रेलवे महाप्रबंधक और दिल्ली एसटी-एससी आयोग सहित कई उच्चाधिकारियों और संस्थाओं से की है। उनकी शिकायत के बाद जबलपुर मुख्यालय द्वारा इस मामले की जांच की जा रही है।
आगे क्या? जांच रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपे जाने के बाद ही इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई होने की उम्मीद है। लोको पायलट पर लगातार चार्जशीट थमाने के आरोपों और एसटी-एससी आयोग की संलिप्तता ने इस मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है।
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