डीग/कामां। राजस्थान के नवनिर्मित डीग जिले के कामां कस्बे में मंगलवार शाम एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया। नवीन बस स्टैंड (अक्खड़वाड़ी मैदान के पास) पर स्थित एक कोल्ड ड्रिंक सप्लायर की दुकान में एलपीजी सिलेंडर फटने से भीषण ब्लास्ट हो गया। धमाका इतना जोरदार था कि इसकी गूंज करीब 2 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी और आसपास के मकानों में कंपन महसूस हुआ।
इस दर्दनाक हादसे में सगे भाई-बहन की मौत हो गई, जबकि महिलाओं और बच्चों समेत 6 अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए। सभी घायलों की हालत चिंताजनक होने के कारण उन्हें जयपुर रेफर किया गया है।
पुलिस और प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, दुकान मालिक की दो ईको वैन (जिनसे गांवों में कोल्ड ड्रिंक सप्लाई की जाती थी) में घरेलू एलपीजी सिलेंडर से अवैध रूप से गैस रिफिलिंग की जा रही थी। इसी दौरान अचानक पास रखे सिलेंडरों में आग लग गई। जब तक परिजन आग बुझा पाते, आग ने विकराल रूप ले लिया और सिलेंडरों में एक के बाद एक धमाके होने लगे।
गनीमत यह रही कि धमाके से महज एक मिनट पहले ही घटनास्थल के सामने से राजस्थान रोडवेज की दो बसें गुजरी थीं, वरना हताहतों का आंकड़ा और भयावह हो सकता था।
धमाके के बाद आग ने दुकान के ऊपर बने रिहायशी मकान को भी अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में झुलसे मनमोहन सिंह और भगवान सिंह चचेरे भाई हैं। इस अग्निकांड में भगवान सिंह के 8 वर्षीय बेटे लक्ष्य और 11 वर्षीय बेटी अफसरा की मौत हो गई। अफसरा ने भरतपुर के आरबीएम (RBM) अस्पताल में दम तोड़ा, जबकि मासूम लक्ष्य की मौत जयपुर पहुंचने से पहले रास्ते में हुई। भगवान सिंह की दूसरी बेटी साक्षी भी इस हादसे में झुलस गई है।
"हम नीचे दुकान में काम कर रहे थे और परिवार ऊपर मकान में था। धमाका इतना तेज था कि लगा जमीन फट गई है। मैं खुद हवा में उड़कर 20 मीटर दूर जा गिरा। परिजन ऊपर से आवाज दे रहे थे कि आज गर्मी बहुत है ऊपर आ जाओ, काश मैं चला जाता तो काम बंद करवा देता और यह हादसा न होता।" — मनमोहन सिंह, पीड़ित व प्रत्यक्षदर्शी
हादसे में कुल 8 लोग झुलसे थे, जिनमें से दो बच्चों की मौत हो चुकी है। वर्तमान में दाताराम, मनमोहन, भगवान सिंह, नीरज (पत्नी भगवान सिंह), सरिता (पत्नी मनमोहन) और साक्षी (पुत्री भगवान सिंह) गंभीर हालत में सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल, जयपुर में उपचाराधीन हैं।
घटना की सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर मयंक मनीष, एएसपी दिनेश यादव, सीओ राजेश शर्मा और थाना प्रभारी भरत सिंह भारी जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे। हालांकि, स्थानीय लोगों में दमकल विभाग को लेकर भारी आक्रोश देखा गया। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि तुरंत सूचना देने के बावजूद दमकल आधा घंटा देरी से पहुंची, जिससे आग ने पूरे मकान को राख कर दिया।
"जांच के दौरान दोनों ईको वैन में अवैध एलपीजी गैस किट मिली हैं। गाड़ियों में घरेलू सिलेंडरों से अवैध रिफिलिंग की जा रही थी, जो पूरी तरह गैरकानूनी है। मामले की गहनता से जांच की जा रही है।" — दिनेश कुमार यादव, एडिशनल एसपी (कामां)
इस हादसे ने स्थानीय चिकित्सा व्यवस्था और प्रशासनिक मुस्तैदी की पोल खोलकर रख दी है:
बर्न वार्ड का न होना विडंबना: डीग को जिला बने लंबा समय बीत चुका है, लेकिन कामां या डीग के सरकारी अस्पतालों में एक 'बर्न वार्ड' तक नहीं है। गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को 54 किमी दूर भरतपुर या सीधे जयपुर रेफर करना पड़ता है। रास्ते के इस सफर में कई बार मरीज दम तोड़ देते हैं।
अफसरों की बेपरवाही: अवैध गैस रिफिलिंग के खिलाफ मीडिया द्वारा लगातार (18 जनवरी 2026 से) जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद अधिकारियों ने ठोस कार्रवाई करने के बजाय केवल औपचारिकता निभाई। आज भी भरतपुर और डीग जिले में सैकड़ों एंबुलेंस और डग्गामार वैन अवैध एलपीजी पर दौड़ रही हैं।
23 फरवरी 2026: भरतपुर के मलाह में गैस सिलेंडर फटने से 3 लोग झुलसे।
4 दिसंबर 2025: मथुरा गेट थाना क्षेत्र में खाना बनाते समय ब्लास्ट, एक बच्चे सहित 4 घायल।
5 अक्टूबर 2025: सेवर थाना इलाके में आर्मी मॉक ड्रिल के दौरान अग्निशमन सिलेंडर फटने से एक अग्निवीर की मौत।
2 अप्रैल 2025: सेवर कस्बे में लकड़ी के खोखों में आग लगने से कई सिलेंडर फटे।
7 नवंबर 2023: डीग के पहाड़ी कस्बे में चलती ईको वैन में लगा एलपीजी सिलेंडर फटा, बाजार में मची अफरातफरी।
स्थानीय निवासियों ने इस दर्दनाक हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार के लिए सरकार से उचित मुआवजे और सहायता राशि की मांग की है।
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