कोटा रेल मंडल में बड़ा हादसा: टावर वैगन पर काम करते कर्मचारी को लगा 25 हजार वोल्ट का करंट, मामले को दबाने में जुटा प्रशासन

कोटा रेल मंडल में बड़ा हादसा: टावर वैगन पर काम करते कर्मचारी को लगा 25 हजार वोल्ट का करंट, मामले को दबाने में जुटा प्रशासन

कोटा: कोटा-रामगंजमंडी रेल खंड के रांवठारोड स्टेशन के पास एक बड़ा रेल हादसा सामने आया है, जहाँ ओएचई (OHE) लाइन की मरम्मत के दौरान एक कर्मचारी हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आ गया। चौंकाने वाली बात यह है कि 27 अप्रैल को हुई इस गंभीर घटना को रेलवे अधिकारियों ने कथित तौर पर दबाए रखा और घायल कर्मचारी को नियमानुसार मिलने वाली सुविधाएं भी नहीं दी गईं।

कैसे हुआ हादसा?

सूत्रों के अनुसार, टीआरडी (TRD) विभाग में हेल्पर के पद पर कार्यरत वीरेंद्र सिंह राठौड़ से नियमों के विरुद्ध टेक्नीशियन का काम लिया जा रहा था। ओएचई मरम्मत के लिए वीरेंद्र को टावर वैगन पर चढ़ाया गया था। इसी दौरान वह 25 हजार वोल्ट के करंट की चपेट में आ गया।

अनुभवहीनता और लापरवाही पड़ी भारी

हादसे का मुख्य कारण डिस्चार्ज रॉड का गलत तरीके से लगाया जाना बताया जा रहा है।

  • नवागंतुक से कराया काम: बताया जा रहा है कि डिस्चार्ज रॉड लगाने का संवेदनशील काम एक ऐसे कर्मचारी को सौंपा गया था, जो महज डेढ़ महीना पहले अनुकंपा नियुक्ति पर भर्ती हुआ था।

  • बड़ी अनहोनी टली: गलत रॉड लगने के कारण वीरेंद्र को करंट लगा और वह वहीं जड़वत (Freeze) हो गया। मौके पर मौजूद एक अन्य टेक्नीशियन ने फुर्ती दिखाते हुए डिस्चार्ज रॉड को सही किया, जिससे वीरेंद्र की जान बच सकी। घटना के समय मौके पर इंजीनियर केके पाल मौजूद थे।

मामले को दबाने का आरोप: नहीं दी गई IOD

अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि अपनी गलती छिपाने के लिए अधिकारियों ने मामले को पूरी तरह दबा दिया:

  1. नहीं मिली IOD: नियमानुसार ड्यूटी के दौरान घायल होने पर कर्मचारी को IOD (Injury on Duty) दी जाती है, लेकिन वीरेंद्र को यह सुविधा नहीं दी गई।

  2. अपनी 'सिक' पर इलाज: वीरेंद्र को रेलवे अस्पताल में 4-5 दिन भर्ती रखने के बाद छुट्टी दे दी गई। IOD न मिलने के कारण अब वह अपनी निजी छुट्टियों (सिक) पर घर रहकर इलाज कराने को मजबूर है।

यह घटना रेलवे में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और निचले स्तर के कर्मचारियों पर दबाव डालकर जोखिम भरे काम कराने की पोल खोलती है। अब देखना यह है कि मामला उजागर होने के बाद उच्च अधिकारी इस पर क्या संज्ञान लेते हैं।


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