कोटा | 15 मई, 2026 कोटा रेल मंडल प्रशासन ने रेल सुरक्षा में गंभीर लापरवाही बरतने पर कड़ा रुख अपनाते हुए वरिष्ठ खंड अभियंता (SSE-रेल पथ) संतोष बौरासी को नौकरी से बर्खास्त (Remove from Service) कर दिया है। अल्ट्रासोनिक जांच के बावजूद पटरी की दरार न पकड़ पाना और पूर्व के भ्रष्टाचार के आरोप संतोष की बर्खास्तगी का मुख्य कारण बने।
संतोष बौरासी की वर्तमान तैनाती शामगढ़ में थी, जहाँ उन पर USFD (अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन) मशीन के जरिए रेल पटरियों की आंतरिक खामियों की जांच करने की जिम्मेदारी थी।
जांच में विफलता: पिछले दिनों संतोष ने पटरी की जांच की थी, लेकिन वे उसमें मौजूद गंभीर गड़बड़ी (Internal Crack) को पकड़ने में नाकाम रहे।
पटरी का टूटना: जांच के कुछ ही दिनों बाद वह रेल पटरी टूट गई। गनीमत रही कि समय रहते रेल फ्रैक्चर का पता चल गया और एक बड़ा ट्रेन हादसा टल गया।
रेलवे बोर्ड तक पहुँचा मामला: यह लापरवाही इतनी गंभीर थी कि इसकी गूँज कोटा मंडल और जबलपुर मुख्यालय से होते हुए रेलवे बोर्ड तक पहुँच गई। बोर्ड के कड़े कड़े रुख के बाद एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी बिठाई गई, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर सेवा समाप्ति का निर्णय लिया गया।
वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ को इस कार्रवाई का अंदेशा पहले ही हो चुका था।
प्रशासन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से यूनियन ने पिछले दिनों डीआरएम कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन भी किया था।
हालांकि, रेल सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मामले में प्रशासन ने नरम रुख अपनाने के बजाय सख्त कार्रवाई को प्राथमिकता दी और प्रदर्शन का कोई असर नहीं हुआ।
बर्खास्त इंजीनियर संतोष बौरासी का विवादों से पुराना नाता रहा है।
रेलवे संपत्ति की चोरी: कुछ वर्ष पहले उन पर रेलवे के पेड़ कटवाकर उनकी लकड़ी बेचने का गंभीर आरोप लगा था।
विजिलेंस और आरपीएफ की जांच: विजिलेंस की जांच में सामने आया था कि संतोष ने सरकारी लकड़ी से न केवल अपने घर का फर्नीचर बनवाया, बल्कि कुछ लकड़ी आरा मशीन पर बेच भी दी थी। इस मामले में आरपीएफ ने मुकदमा भी दर्ज किया था।
उल्लेखनीय है कि 'कोटा रेल न्यूज़' ने इस लकड़ी चोरी के मामले को प्रमुखता से उजागर किया था, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया था।
रेलवे की इस कार्रवाई ने मंडल के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ा संदेश दिया है कि संरक्षा (Safety) के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खासकर USFD जांच जैसे संवेदनशील काम में लापरवाही हजारों यात्रियों की जान जोखिम में डाल सकती है।
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